बहादुरगढ़। प्रदेश में जैसी ही चुनाव नजदीक आते हैं वैसे ही इलेक्शन करेंसी के माध्यम से वोटरों को जोड़ने और तोड़ने का खेल शुरू हो जाता है। इसके साथ ही इलेक्शन करेंसी की मांग भी बढ़ जाती है। कुछ ऐसा ही प्रदेश में हो रहे नगर निगम के चुनाव में देखने और सुनने को मिल रहा है। हालांकि इलेक्शन करेंसी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
इलेक्शन करेंसी से वोट बैंक का गणित
चुनाव नजदीक आते ही उम्मीदवारों ने वोटरों को लुभाने के लिए चुनावी एजेंडों के साथ इलेक्शन करेंसी की भी मदद लेनी शुरू कर दी है। उम्मीदवारों ने अपने वार्ड में ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को जोड़ने के लिए अपने-अपने तरीके से तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव में खड़े उम्मीवार अपने वोट बैंक को फुल करने के लिए चुनावी गणित में जुट गए हैं। हालांकि यह गणित कितना सफल हो पाएगा यह चुनावी परिणाम ही बताएंगे। लेकिन चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवार अपनी तरफ से कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
क्या है इलेक्शन करेंसी
देश-प्रदेश में जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तो भारतीय करेंसी में इलेक्शन करेंसी भी लोगों के जेब में मिल जाएगी। इतना ही नहीं लोगों के जेब के साथ कुछ दुकानों के मालखाने में भी इलेक्शन करेंसी ने जगह बना ली है। वाइन शॉप के मालखाने में भारतीय करेंसी के साथ इलेक्शन करेंसी भी रखी मिलेगी। भारतीय करेंसी में गवर्नर की ओर से लिखा होता है कि मैं धारक को पांच रुपये अदा करने का वचन देता हूं। वहीं इलेक्शन करेंसी में दिनांक के साथ लिखा होता है कि पांच क्वाटर दे देना। इसके बाद उस करेंसी में किसी गवर्नर के हस्ताक्षर नहीं होते हैं बल्कि किसी उम्मीदवार या उसके द्वारा नियुक्त किए गए किसी समर्थक के होते हैं।
ऐसे चलती है इलेक्शन करेंसी
उम्मीदवार को समर्थन देने वाले लोग वोटरों को जोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। उम्मीदवार अपने हर कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाता है कि वोट को जोड़ने के लिए बदले में इलेक्शन करेंसी दी जाती है। कार्यकर्ता का काम होता है कि एक वोट को जोड़ने के लिए एक क्वाटर की इलेक्शन करेंसी को देना और यह भी बताना की कहां से लेनी है। कार्यकर्ता करेंसी तभी देता है तब उसका वोट पक्का हो जाए।
सभी दुकानों पर नहीं चलती है इलेक्शन करेंसी
वोटरों को लुभाने और वोट बैंक पक्का करने के लिए जिस इलेक्शन करेंसी के इस्तेमाल किया जाता है वह शहर में किसी भी दुकान पर नहीं चलती है। वोटर को दी जाने वाली करेंसी एक निर्धारित दुकान पर ही मान्य होती है। वह दुकान भी करेंसी देने वाला ही बताता है कि किस दुकान से क्या सामान लेना है। वोटर भी इलेक्शन करेंसी लेने के बाद बताई हुई दुकान पर जाता है और इलेक्शन करेंसी देकर अपना सामान ले लेता है।