मानव सेवा से प्रशस्त होता है अध्यात्म का मार्ग : प्रेमलता
चरखी दादरी।
अध्यात्म का मार्ग हमेशा से ही मानव सेवा से ही प्रशस्त होता है। जीवन को सार्थकता प्रदान करना ही व्यक्ति का प्रथम कर्म होना चाहिए। प्रभु भक्ति का अनुसरण करना है तो हमें सबसे पहले अपने अंतर से इसकी शुरूआत करनी होगी। हर कण एवं प्राणी में उस परम शक्ति का वास है इसलिए प्रत्येक दु:खी मानव के विकट समय में सहायता करना ही सच्ची प्रभु भक्ति है। ये विचार स्थानीय ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी प्रेमलता ने लोगों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
वे रविवार को स्थानीय किला मैदान में गरीबों के लिए कार्य करने वाली संस्था खुशियों की दीवार में व्यवस्था का अवलोकन कर रही थी।
उन्होंने कहा कि यह संस्था व इसके संचालक संजय रामफल द्वारा किया जा रहा यह कार्य सराहनीय है। युवाओं को तो अवश्य ही समाज सेवा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। जब समाज की युवा शक्ति इस तरह का संकल्प धारण कर लेती है तो एक प्रकार से सामाजिक संरक्षण का आवरण तैयार होता है। इस तरह के प्रयास अधिक से अधिक किए जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी प्रियंका, पूजा, सुशील , सतपाल भी मौजूद थे।