अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के गृह हलके में पंचायत के लिए बनाई जा रही नई नीति का विरोध शुरू हो गया है। विरोध करते हुए बादली ब्लॉक सरपंचों ने गांव के सभी कामकाज बंद करने का फैसला लिया है। फैसला बादली उपमंडल कार्यालय में हुई ब्लॉक सरपंचों की बैठक में लिया गया। बैठक ग्राम सचिवों ने भी हड़ताल करते हुए भाग लिया।
सब डिवीजन में बादली ब्लॉक सरपंचों ने सरकार की ग्रामीण विकास के लिए बनाई जीडीपीडी नीति का विरोध किया गया। सरपंचों ने नीति को लागू करने की मांग प्रदेश सरकार से की। सरपंचों ने जीपीडीपी और ई-बिल योजना को ग्रामीण विकास में बाधा बताते हुए इसे तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक प्रधान अमित छनपाडिय़ा ने की जबकि ब्लॉक के दो दर्जन से ज्यादा सरपंच और ग्राम सचिव भी मौजूद रहे। सरपंच एसोसिएशन के ब्लॉक प्रधान अमित छनपाडिय़ा ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए जीडीपीडी नाम से नई योजना बनाई है। योजना में सरपंचों को केवल कठपुतली की तरह काम करने की शक्तियां हैं। नीति के अनुसार पंचायतों को गांव के विकास के लिए वार्षिक मांग रखनी होगी। सरपंचों का कहना है कि वार्षिक मांग रखना तो ठीक है मगर इससे वह काम बाधित हो जाएंगे जो कि जरूरी करने होते हैं।
एजेंडे से अलग ग्राम पंचायतें कोई काम करने का अधिकार नहीं रखती। ऐसे में पंचायतें केवल नामात्र की रह जाएंगी। बैठक में महाबीर पेलपा, सुनील माजरा, सतबीर गुभाना, चांद लगरपुर, संदीप दरियापुर, कुलदीप जहांगीपुर, सतीश गंगड़वा, रामनिवास खुंगाई, राजकुमार लाडपुर और अशोक सहित ग्राम सचिव मनोज, मुकेश विजय व रविन्द्र सहित काफी संख्या सरपंच और सरपंच प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सरपंचों का तर्क
सरपंचों ने बताया कि इस नीति के तहत वार्षिक योजनाओं और विकास कार्यों की सूची तैयार की जाएगी। मगर साल के बीच में जरूरी कार्य करने की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी। सरपंचों का कहना है कि अचानक पाइप लाइन, बिजली के तारों का टूटना, नालों की सफाई करवाना इत्यादि ऐसे कार्य हैं जिनकी वार्षिक रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती। सरकार की ओर से केवल वही बिल पास किए जाएंगे जो कार्य वार्षिक रिपोर्ट में शामिल होंगे।
बैठक के फैसले
बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक नीति को वापस नहीं लिया जाता कोई भी सरपंच गांव में काम नहीं करवाएगा। वार्षिक रिपोर्ट का रिकॉर्ड भी जमा नहीं करवाया जाएगा। 22 मार्च को झज्जर में जिला उपायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसी भी सूरत में ई-बिल को लागू नहीं होने दिया जाएगा। सभी सरपंच एकजुट रहेंगे और ग्राम सचिवों को भी सहयोग लेंगे। इसके अतिरिक्त 28 मार्च चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे।
हरियाणा एसोसिएशन ने मांगा सहयोग
बैठक में अमित छनपाड़िया ने बताया कि पूरे प्रदेश के सरपंचों ने इस मामले में बादली ब्लॉक के सरपंचों से मदद मांगी है। सभी सरपंचों को उम्मीद है कि बादली हलके से प्रदेश के पंचायत मंत्री है जिसके चलते बादली ब्लॉक के सरपंचों का विशेष महत्व होगा। ऐसे में हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के साथ बादली ब्लॉक सरपंच कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेंगे।