झज्जर। एक बार तो ऐसा लगा था कि मैं परिवार से काफी दूर आ गई हूं। लेकिन दूसरे ही पल खुद को संभाला और हिम्मत जुटाई। फिर सोचा कि मैं ठीक होकर एक बार फिर से परिवार के बीच जाऊंगी। आठ दिन परिवार से अलग रहकर अस्पताल में इलाज करवाया और हिम्मत नहीं हारी तो कोरोना की जंग जीत गई। अस्पताल में खाना भी समय पर देते थे और चाय भी। समय-समय पर चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी भी इलाज के लिए आते थे। वे टेस्ट करके दवा देते थे, लेकिन सबसे बड़ी तो बात हिम्मत रखने की थी। अगर कोरोना से घबरा जाती तो जल्दी ठीक नहीं होती। यह कहना है छावनी मोहल्ले के दुर्गा मंदिर के पास रहने वाली 70 वर्षीय महिला नथिया देवी का।
कपड़े व मिट्टी के बर्तनों की लगाती हैं दुकान
नथिया देवी ने बताया कि वह छावनी मोहल्ले के दुर्गा मंदिर के पास कपड़े व मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाती हैं और उससे अलग कहीं नहीं जाती। वहीं पर वह किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क र्में आईं। जब उन्हें बुखार हुआ तो जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंचीं। कोरोना टेस्ट हुआ तो 20 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्हें शहर के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। आठ दिन तक वह अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रहीं। उनके कमरे में 4 बेड थे और उन पर सभी संक्रमित थे। परिवार से अलग रहकर उन्होंने अपना इलाज करवाया और परिवार को भी संक्रमित होने से बचाया। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतने से ही संक्रमण से बचा जा सकता है। इसलिए हर व्यक्ति अपना और अपने परिवार का बचाव करें और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बताए गए नियमों का पालन करें। वह 27 अप्रैल को अस्पताल से वापस आई हैं।
बरत रहे हैं सावधानी
नथिया देवी का कहना है कि अब तो वह कोरोना की जंग जीत चुकी हैं। परिवार के अन्य सदस्यों को भी घर में भी मास्क लगाने व बार-बार हाथ धोने की सलाह दे रही हैं। उसके परिवार में बेटे, बहू व उनके बच्चे भी हैं। अस्पताल में रहकर परिवार की याद आती थी, लेकिन इस बीमारी से बचाव करने के लिए परिवार से अलग रहना भी जरूरी था।