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तीन दिन से गोदाम पर खाली नहीं हो रहीं गेहूं से भरी खड़ी गाड़ियां

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झज्जर। अनाज मंडियों में गेहूं की खरीद का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। वहीं भंडारण को लेकर समस्या बनी हुई हे। गोदाम पूरी तरह से फुल हो चुके हैं और अब खरीद एजेंसियां गेहूं के भंडारण के लिए जगह की तलाश कर रही हैं। गोदामों में कवर्ड एरिया में सरसों का भंडारण किया गया है। वहीं गेहूं का भंडारण खुले आसमान के नीचे किया जा रहा है। लेकिन गोदामों का ओपन स्पेस भी फुल हो चुका है और तीन से अनाज मंडियों और गोदामों पर गाड़ियां गेहूं के कट्टों से भरी खड़ी हैं। जिससे किसानों को ही नहीं गाड़ियों के मालिकों और आढ़तियों को भी परेशानी आ रही है। किसानों को राशि के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। जिला में अब तक करीब 18 लाख
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क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है और 11 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं का उठान भी हो चुका है। जबकि करीब सात लाख क्विंटल गेहूं अनाज मंडियों में खरीदा हुआ पड़ा है। खरीद एजेंसियों के नियमानुसार खरीदा गया गेहूं गोदाम में पहुंचने और भंडारण के बाद उसकी राशि किसानों को जारी की जाती है। शुक्रवार की शाम तक करीब 4500 किसान अपना गेहूं बेच चुके हैं। जिला की अनाज मंडियों में खरीदे जाने वाले गेहूं के भंडारण के लिए कवर्ड गोदाम भी पूरे नहीं हैं।
26 हजार एमटी के हैं कवर्ड गोदाम, खुले में लगाया जा रहा अनाज
जिला में गेहूं खरीद के लिए 2.15 लाख एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन कवर्ड गोदामों की क्षमता को देखा जाए तो जिला में खाद्य आपूर्ति विभाग व हैफेड के पास मात्र 26 हजार एमटी के गोदाम हैं। इसके अलावा वेयर हाउस की तरफ से गुढ़ा गांव के पास प्राइवेट गोदाम भी लिया गया था। बताया जा रहा है कि यह गोदाम भी फुल हो चुका है। खरीद एजेंसियों के पास खुले आसमान के नीचे गेहूं का भंडारण करने के अलावा कोई चारा नहीं है। जिला की आठ अनाज मंडियों में गेहूं की खरीद की जा रही है। इन मंडियों में खरीदा गया अनाज तलाव गांव के पास स्थित हैफेड के गोदामों के अलावा खाद्य आपूर्ति विभाग के बेरी और बहादुरगढ़ के गोदामों में भंडारण किया गया है। खुले आसमान के नीचे गेहूं के भंडारण गेहूं के खराब होने का भय बना रहता है और काफी गेहूं वर्षा आदि के कारण खराब भी हो जाता है। तीन दिन से अनाज मंडियों में ट्रक गेहूं से भरे खड़े हैं। लेकिन गोदामों पर गेहूं नहीं उतारा जा रहा है। हैफेड सेक्टर नौ व हरियाणा वेयर हाउस कॉरपोरशन बिरधाना गांव में स्थान तलाशने की बात कह रहा है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या आढ़तियों और किसानों के सामने आई हुई है।
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वर्जन
गाड़ियों को वापस मंडी में खाली करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे आढ़तियों को गाड़ी में गेहूं लोड करवाने और उतारने का खर्च देना पड़ रहा है। वहीं दोबारा से फिर गाड़ियों में कट्टे भरे की लेबर भी देनी पड़ेगी। किसान पैसे के लिए उनके पास चक्कर काट करहे हैं।
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- चांद सिंह पहलवान, प्रधान आढ़ती एसोसिएशन, अनाज मंडी, झज्जर।
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