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मिसाल : पेड़ों को बच्चों की तरह पालकर मिसाल कायम कर रहा मांडोठी का सरकारी स्कूल

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़। पहलवानों के गांव मांडोठी का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हरियाली की मिसाल कायम कर रहा है। यहां के अध्यापकों और विद्यार्थियों ने बीते चार साल में अपने दृढ़ संकल्प से काफी पौधों का पोषण कर उन्हें पेड़ बना दिया है। वर्ष 2014 में जहां स्कूल प्रांगण में मात्र 14 सफेदे के पेड़ थे, अब यहां फल व छायादार 4 हजार पेड़ हो गए हैं।
स्कूल प्रांगण में जामुन, शहतूत, अर्जुन, नीम, बरगद, पीपल, सीसम व सफेदे सहित कई तरह के पेड़ हैं। पेड़ों में समय-समय पर नलाई, कीटनाशक व खाद डालने का कार्य स्कूल स्तर पर किया जाता है। पेड़ों को पानी देने के लिए स्कूल स्तर पर ही एक सबमर्सिबल लगवाया गया है। पेड़ों तक पानी पहुंचाने के लिए जमीन के नीचे से लाइन भी बिछाई गई है। पेड़ों की देखरेख में होने वाला खर्च यहां के स्टाफ द्वारा वहन किया जा रहा है।
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बच्चों को मुहिम से जोड़ा
विद्यार्थी वर्ग जागरूकता मुहिम में अहम कड़ी साबित होता है। इसलिए स्कूल स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों को इस हरियाली की मुहिम से जोड़ा गया है। यहां पौधे लगाने और उसकी देखरेख करने वाले बच्चे को पैसे भी दिए जाते हैं। जो भी बच्चा पेड़ लगाता है छह महीने में उसके खाते में 50 रुपये डाले जाते हैं।
बच्चों की तरफ पाल रहे हैं : छिकारा
बाग का रूप ले चुके प्रांगण की देखरेख के लिए स्कूल में म्यूर इको क्लब का गठन किया गया है। इसके इंचार्ज गणित के अध्यापक पुरुषोत्तम छिकारा हैं। छिकारा ने कहा कि पौधों को पेड़ बनने तक बच्चों की तरह पाला गया है। अब भी कोई ऐसा दिन नहीं होता, जब इन्हें खाद-पानी न दिया जाता हो। छुट्टी के दिन भी इनकी देखभाल की जाती है। सतबीर, रविकिरण, मीना कुमार, सुरेश, सुखबीर, नीलम, विनीत, जयपाल, पीटीआई राजेश, मनीषा, आर्यव्रत, सुरेश पहलवान, सुमित, राजेश, हरेंद्र, दर्शना, समीक्षा, नरेश और चरणे आदि अध्यापक व ग्रामीण इस प्रेरक कार्य में योगदान दे रहे हैं।
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ऐसे हुई शुरुआत
स्कूल के प्राचार्य रवि धनखड़ ने बताया कि पहले स्कूल प्रांगण की हालत खस्ता थी। दीवार न होने के कारण खाली पड़ी जमीन पर बेसहारा पशुओं का झुंड रहता था। परिसर में मात्र सफेदे के 14 ही पेड़ थे। इसके बाद वे यहां आए तो उन्हें महसूस हुआ कि भूमि का सही इस्तेमाल हो, फिर मुहिम शुरू कर दी गई। 2014 एकड़ में जहां सिर्फ 14 पेड़ थे वहां अब 2018 में चार हजार जीवित पेड़ हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को प्रकृति प्रेम से जोड़ना समय की जरूरत है। स्कूल का परीक्षा परिणाम भी अच्छा रहता है। जल्द ही बच्चों के लिए यहां भव्य भवन का निर्माण होगा।
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