अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। आस्था का पर्याय बने श्यामसर तालाब का जीर्णोद्घार करवाने में एक तरफ जिला प्रशासन पहले ही लेट है और अब यहां डी-वॉटरिंग का प्रबंध न खोज पाने से इस प्रोजेक्ट में रुकावट पैदा हो गई है। तालाब का पानी बदलने का विकल्प नहीं होने से यह प्रोजेक्ट पिछले कई माह से ठंडे बस्ते में पड़ा है। नगर परिषद के अलावा जन स्वास्थ्य विभाग भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा है, लेकिन इसके बाद भी दो माह से अधिक समय बीत जाने पर भी समाधान नहीं निकल पाया हैं। इसके चलते सीएम मनोहरलाल की यह घोषणा दो साल बाद भी घोषणा ही बनी हुई है। इसकी एस्टिमेट प्रक्रिया करीब एक साल पहले ही पूरी हो चुकी है लेकिन धरातल पर काम शुरू होने का लंबे समय से इंतजार है।
सीएम की इस घोषणा की डीसी अजय सिंह तोमर भी मॉनीटरिंग कर रहे हैं लेकिन कोई विकल्प प्रशासन को नहीं सूझ रहा है। जिला प्रशासन का तर्क हे कि इस तालाब में दूषित पानी नहीं जा रहा है, लेकिन इसे खाली करने और दोबारा भरने का रास्ता अभी निकाला जाना बाकी है। वहीं, अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में जिला प्रशासन के दावों के विपरीत स्थिति नजर आई। अमर उजाला टीम ने यहां पहुंचकर जांच की तो तालाब में नालियों के जरिए दूषित पानी गिरता नजर आया। यहां एक-दो नहीं बल्कि पांच नालियों का दूषित पानी पहुंच रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि लोगों ने तालाब तक निजी नालियां बनवा रखी हैं लेकिन विभागों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक को इसकी खबर नहीं है। नगर परिषद से लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों सहित डीसी तक यहां का जायजा ले चुके हैं। अब तक किसी ने एतिहासिक व आस्था का प्रतीक माने जाने वाले श्यामसर तालाब में दूषित पानी की निकासी रोकने के इंतजाम नहीं किए हैं। अब तक प्रशासन की तरफ से इन नालियों को बंद करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
आर्किटेक्ट ने 17 करोड़ का एस्टिमेट किया था तैयार
नगर परिषद ने करीब एक साल पहले इस प्रोजेक्ट को शुरू कराने के लिए गुरूग्राम से एक आर्किटेक्ट हायर किया था। इसके बाद आर्किटेक्ट अपनी टीम सहित मौके पर पहुंचा था और इसकी ड्राइंग तैयार कर नप अधिकारियों को सौंपी थी। इसके बाद इसका एस्टिमेट तैयार कर सरकार को भेजा गया था। इसके मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर करीब 17 करोड़ रुपये की लागत आनी थी।
एडीसी के नेतृत्व में गठित टीम सौंपेगी डीसी को रिपोर्ट
जन स्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद को डी-वॉटरिंग का प्रबंध करने का आदेश डीसी अजय सिंह तोमर ने दिए थे। अब तक दोनों विभाग इसमें नाकाम रहे हैं। गत दिनों आयोजित मासिक बैठक में डीसी ने एडीसी मनोज कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी है। यह टीम डीसी को इस प्रोजेक्ट की रुकावटों पर इन्हें दूर करने के विकल्पों संबंधी रिपोर्ट सौंपेगी।
ऐतिहासिक तालाब में जा रहा दूषित पानी
जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते तालाब में घरों का दूषित पानी जा रहा है। यह समस्या यहां लंबे समय से बनी है और इससे जिला प्रशासन भी वाकिफ है। तालाब में दूषित पानी डालने का विरोध सामाजिक संगठन भी कर चुके हैं। इस तालाब के चारों तरफ मंदिर बने हैं और इनमें काफी तादाद में श्रद्धालु आते हैं।
दो सीएम कर चुके हैं जीर्णोद्घार की घोषणा, पूरी किसी की नहीं हुई
गत कांग्रेस राज में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दो करोड़ से तालाब की कायाकल्प कराने की घोषणा की थी लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद सीएम मनोहर लाल ने नई अनाज मंडी में आयोजित तालाब के जीर्णोद्घार की घोषणा की थी लेकिन अब तक धरातल पर काम तक शुरू नहीं हो पाया है। नगर परिषद यहां के सौंदर्यीकरण से लेकर इसे पर्याटन स्थल में तबदील करने का खाका तैयार कर चुकी है।
जन स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद को डी-वॉटरिंग के प्रबंध करने में दिक्कतें आ रही हैं। जल्द ही एडीसी मनोज कुमार के नेतृत्व में गठित टीम मुझे इससे संबंधित रिपोर्ट सौंप देंगे। जल्द ही यह प्रोजेक्ट शुरू कराने का जिला प्रशासन भरसक प्रयास कर रहा है।
-अजय सिंह तोमर, डीसी, चरखी दादरी