झज्जर। प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय से दमकल को अलग विभाग बनाने के बाद भी कर्मचारियों की कमी खल रही है। कच्चे कर्मचारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इन कच्चे कर्मचारियों के अनुबंध की समय सीमा भी आठ अप्रैल को पूरी हो चुकी है। चार दिन से आपातकालीन सेवाएं होने के कारण व विभाग से मंजूरी मिलने के इंतजार में कच्चे कर्मचारी बिना मंजूरी के ही काम कर रहे हैं। लेकिन दमकल विभाग की ओर इन कर्मचारियों का अनुबंध नहीं बढ़ाया गया है। इस समय फसलों का सीजन चल रहा है और आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती है। ऐसे समय पर कर्मचारियों का अनुबंध न बढ़ाया जाना विभाग की लापरवाही को साफ दर्शा रहा है। प्रदेश भर में करीब 1346 कच्चे कर्मचारी दमकल विभाग में काम कर रहे हैं। जबकि झज्जर जिले में करीब 36 कच्चे कर्मचारी हैं। झज्जर के दमकल केंद्र में 6 और बहादुरगढ़ के दमकल केंद्र में करीब 30 कच्चे कर्मचारी हैं।
ये हैं संसाधन
झज्जर के दमकल केंद्र में मात्र सात पक्के कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियों व एक बाइक है। इनके हिसाब से अकेले झज्जर के दमकल केंद्र में 90 कर्मचारी चाहिए। लेकिन यहां पर कच्चे व पक्के कर्मचारियों को मिला कर प्रभारी सहित मात्र 13 कर्मचारी हैं। विभाग के अधिकारियों को इस बात का पता था कि आठ अप्रैल को प्रदेश भर के दमकल विभाग के कच्चे कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त हो जाएगा तो इससे पहले ही कार्रवाई करना उचित नहीं समझा गया।
फसलों के सीजन में बढ़ती हैं आग लगने की घटनाएं
मार्च के बाद जब किसानों की गेहूं व सरसों की फसलें पक कर तैयार होती हैं तो आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। क्योंकि इस समय फसल पककर तैयार होने के कारण सूख भी जाती है। वहीं खेतों के अंदर से गुजरने वाली बिजली की लाइनों व खेतों में रखे ट्रांसफार्मरों में होने वाले शॉर्ट-सर्किट के कारण अधिकांश घटनाएं होती हैं। आग बुझाने के लिए लोग दमकल केंद्र में कॉल करते हैं। कई बार एक ही समय में कई स्थानों पर आग लग जाए तो कर्मचारियों की कमी के कारण गाड़ियां घटना स्थलों पर नहीं पहुंच पाती।
कच्चे कर्मचारियों का अनुबंध आठ अप्रैल को समाप्त हो गया था। इस बार विभाग से मंजूरी मिलने में देरी अवश्य हुई है लेकिन जल्द ही विभाग से मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
बिजेंद्र डागर, दमकल केंद्र प्रभारी, झज्जर।