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पटेल नगर में सांड की टक्कर से बुजुर्ग महिल की मौत

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पटेल नगर में सांड की टक्कर से बुजुर्ग महिला की मौत
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बहादुरगढ़। शहर के पटेल नगर में बीती रात खाना खाने के बाद टहल रही एक बुजुर्ग महिला को सांड ने उठा कर फेंक दिया। हादसे में जख्मी हुई बुजुर्ग महिला ने करीब सात घंटे बाद नागरिक अस्पताल में दम तोड़ दिया। बुजुर्ग महिला की मौत ने एक बार फिर प्रशासन के स्ट्रे कैटल अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले एक पूर्व पार्षद के पिता की भी सांड की चपेट में आने से मौत चुकी है।
दरअसल, बहादुरगढ़ के पटेल नगर की निवासी साभो देवी (74) बुधवार की रात को खाना खाने के बाद टहलने के लिए घर से निकली। करीब साढ़े आठ बजे घर से कुछ दूरी पर जब वह 27 फुटा रोड पर पहुंची यहां अचानक उनके सामने छुट्टा गोवंश (सांड) आ गया। एकाएक सांड के सामने आने से बुजुर्ग महिला संभल नहीं पाई और सांड ने उन्हें सींगों से उठा फेंक दिया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत परिजनों को सूचना दी। महिला की छाती और सिर में चोट आई। कान और नाक से खून बहने लगा। परिजनों ने उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां उपचार के दौरान उनकी हालत में सुधार तो हुआ लेकिन करीब सात घंटे बाद साभो देवी ने दम तोड़ दिया। वीरवार की सुबह परिजनों ने बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में सेक्टर-6 चौकी के पास कोई सूचना नहीं है। मृतका के भतीजे प्रदीप तंवर का कहना है कि शहर के हरेक रोड व कॉलोनियों में छुट्टे पशु घूम रहे हैं। कई लोगों की मौत होने के बावजूद प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं है।
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पहले भी हुए हैं हादसे
जुलाई 2017 में लाइनपार के निवासी पूर्व पार्षद बलजीत नांदल के पिता चंद्र नांदल जब टहले रहे थे तो एक सांड ने उन्हें टक्कर मार दी थी। सात महीने बेड रेस्ट के बाद उन्होंने फरवरी में दम तोड़ दिया था। उसी दौरान लाइनपार निवासी बुजुर्ग शेर सिंह की भी दो सांडों की चपेट में आने से मौत हुई थी। इसके अलावा 2017 में ही रोहतक रोड पर किला मोहल्ला निवासी युवक व बादली रोड पर बांबे वाली गली के निवासी ललित की मौत हुई थी। इनकी मोटरसाइकिलें पशुओं से टकरा गई थी।

स्ट्रे कैटल मुहिम फेल
दरअसल, पिछले साल प्रशासन की ओर से स्ट्रे कैटल मुहिम चलाई गई। इस मुहिम के तहत ऑन रिकार्ड प्रशासन द्वारा शहर से 800 छुट्टे गोवंश उठाकर गोशालाओं में भेजे गए थे। हालांकि कुछ दिनों तक चली उक्त मुहिम के बावजूद शहर में कुछ गोवंश रह गए। अब धीरे-धीरे पहले जैसे हालात हो गए हैं। शहर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं, जहां गोवंश न दिखाई पड़े। रोहतक-दिल्ली रोड, झज्जर रोड पर सड़कों के बीचों बीच गोवंश की मौजूदगी रहती है, इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। पशु प्रेमी विनोद ने बताया कि प्रशासन द्वारा सही व्यवस्था न होने के कारण यह मुहिम सफल नहीं हो पाई। प्रशासन के दबाव के चलते गोशालाओं में इन्हें भर तो दिया गया, मगर धीरे-धीरे फिर से छोड़ा जाने लगा।
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एक हजार छुट्टे गोवंश
फिलहाल शहरी क्षेत्र में लगभग एक हजार गोवंश खुले घूम रहे हैं। गोसेवा में सक्रिय रमेश राठी ने बताया कि गोवंश तो मूक प्राणी हैं। भूख-प्यास से व्याकुल होकर इधर-उधर भटकते हैं। अनदेखी के कारण इनकी खुद की तो मौत हो रही है, आमजन को भी इनसे नुकसान हो रहा है। गोवंश के रहन-सहन के लिए प्रशासन को सही व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी को भी समस्या न हो।
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