वीडियो कॉल के जरिये अपने परिजनों से बातचीत करती महिलाएं। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर पुरुष किसानों के साथ-साथ महिलाओं की संख्या भी आंदोलन में बढ़ती जा रही है। एक दिन पहले किसानों द्वारा मनाए गए महिला दिवस पर पंजाब के कई शहरों से अपने बच्चों के साथ महिलाएं पहुंची थी। इनमें बठिंडा की रहने वाली जसप्रीत कौर भी अपने साथ 46 महिलाओं को लेकर पहुंची हैं। इनमें कई महिलाएं अपने बच्चों को भी साथ लेकर आई हैं। आंदोलन में शामिल हुई बठिंडा की महिलाओं का कहना है कि वे यहां पर अपने किसान भाइयों को समर्थन देने के लिए पहुंची हैं और अब वह यहां से कानून वापस होने पर ही घर की वापसी करेंगी। चाहे इसके लिए कितना भी समय क्यों न लग जाएं। उन्हें खाने-पीने और रहने की कोई परेशानी नहीं है। फिलहाल उक्त महिलाएं परनाला रोड पर एक बिल्डिंग में रुकी हुई हैं।
बठिंडा जिले के गांव मंडी कलां की रहने वाली महिला जसप्रीत कौर, जसकिरण, गुरप्रीत, दीपल ने बताया कि केेंद्र किसानों की मांगों को नहीं पूरा कर रही है। जबकि कड़ाके की ठंड में किसान डेढ़ महीने से डटे हुए हैं। केंद्र द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानून किसानों के खिलाफ हैं। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। गुरप्रीत ने बताया कि महिलाएं न केवल अकेली यहां पहुंची हैं बल्कि अपने बच्चों को भी आंदोलन में लेकर आई हैं। इनमें 8 साल का अरमानदीप, 9 साल का कोमलप्रीत और 11 साल का जसप्रीत के अलावा 18 साल की सतिंदर कौर शामिल हें। सभी तीनों कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए यहां किसानों के समर्थन में पहुंचे हैं।
वीडियो कॉल के जरिये करती हैं महिलाएं परिजनों से बातचीत
परनाला रोड पर एक बिल्डिंग में बठिंडा से आई 46 महिलाएं ठहरी हुई हैं। महिलाओं का कहना है कि जब भी उन्हें अपने परिजनों से बातचीत करनी होती है तो वे न केवल वॉयस कॉल के जरिये बातचीत करते हैं बल्कि वीडियो कॉल से आमने-सामने बातें करते हैं। दिन भर में कई बार परिजनों का अता-पता लेते रहते हैं। उनका मकसद तीनों कानूनों को रद्द कराना है। इसको लेकर वे यहां पर डटी हुई हैं।