झज्जर। करवाचौथ के पावन पर्व पर व्रतधारी महिलाओं ने दोपहर के समय करवाचौथ की कथा सुनकर अपने पति की लंबी आयु की कामना की। पंडित शिव औम भारद्वाज ने करवा चौथ के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस पर्व में महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। शाम को छलनी से चांद के दर्शन करने के बाद अपने पति की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं।
पंडित शिव औम भारद्वाज ने करवा चौथ में छलनी, चांद और करवा का विशेष महत्व के बारे में बताया कि करवा चौथ में छलनी के पीछे एक पौराणिक कथा है। एक पतिव्रता स्त्री जिसका नाम वीरवती था, इसने विवाह के पहले साल करवाचौथ का व्रत रखा, लेकिन भूख के कारण इसकी हालत खराब होने लगी। भाईयों से बहन की यह स्थिति देखी नहीं जा रही थी। इसलिए चांद निकलने से पहले ही एक पेड़ की ओट में छलनी के पीछे दीप रखकर बहन से कहने लगे कि देखो चांद निकल आया है। बहन ने झूठा चांद देखकर व्रत खोल लिया। इससे वीरवती के पति की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि पत्नी जब छलनी से अपने पति को देखती है तो उसके देखने अभिप्राय यह होता है कि मैंने अपने ह्दय के सभी विचारों व भावनाओं को छलनी में छानकर शुद्ध कर लिया है, जिससे मेरे मन के सभी दोष दूर हो चुके हैं और अब मेरे ह्दय में पूर्ण रूप से आपके प्रति सच्चा प्रेम ही शेष है। यही प्रेम में आपको समर्पित करती हूं और अपना व्रत पूर्ण करती हूं।