बादली। एक तरफ जहां पशुपालकों की आमदमी बढ़ाने के लिए सरकार दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर दादरी तोए गांव स्थित पशु अस्पताल चिकित्सक की लापरवाही की भेंट चढ़ा है। इसी का परिणाम है कि बदलते मौसम के दौरान पशुओं में फैली बीमारियों के दिनों में मात्र 3 से 5 ओपीडी अस्पताल में पहुंचती है। शनिवार को अस्पताल में पहुंची तीनों ओपीडी में पशुओं की जांच वीएलडी ने ही की। ऐसे में पशुपालक निजी चिकित्सकों के सहारे ही पशुओं का इलाज करा रहे हैं।
शनिवार की दोपहर एक बजे तक पशु अस्पताल में मात्र 3 ओपीडी ही पहुंची। दादरी तोए गांव का पशुपालक आसपास के कई गांवों में एकमात्र पशु अस्पताल है। हजारों पशुओं पर एक मात्र अस्पताल में नाममात्र की ओपीडी ही साबित कर रही है कि पशुपालकों को सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं है और वह निजी चिकित्सकों से अपने पशुओं का इलाज करा लेते हैं। चिकित्सक अस्पताल में नहीं मिला। सभी पशुओं की जांच वीएलडी ने की। सहायक के तौर पर कार्यरत कर्मचारी भी अस्पताल में नहीं मिला। वीएलडी ने बताया कि सहायक दादरी तोए गांव से ही है और वह बिना छुट्टी लिए अपने किसी काम से घर गया हुआ है। ऐसे में पशुपालन विभाग की ओर से किए जा रहे सभी दावों की हवा निकल रही है। जब अस्पताल में कार्यरत डाक्टर राजन से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह किसी काम से बाहर गया हुआ था। इसी के चलते वीएलडी ने पशुओं की जांच की है। वह भी थोड़ी देर में अस्पताल पहुंचेंगे।