अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
जिले में सरकार के अधिकतर विभागों की जनसूचना अधिकार-2005 में कोई रुचि नहीं है। तमाम अधिकारी ये भी नहीं जानते कि उनके विभाग का जनसूचना अधिकारी कौन है। यह खुलासा बहादुरगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता के प्रयासों से हुआ है।
शहर की कॉलोनी कच्चा बाग के निवासी राहुल मंडोरा ने गत 22 जनवरी को उपायुक्त झज्जर को पत्र लिखकर पांच बिंदुओं पर आरटीआई एक्ट 2005 के तहत जानकारी मांगी थी। डीसी के माध्यम से प्राप्त जानकारी से खुलासा हुआ है कि जिले के सभी 64 विभागों को जनसूचना अधिकार एक्ट 2005 का न के बराबर ज्ञान है। राहुल मंडोरा को भेजे गए पत्र में बताया कि 68 विभागों में से ज्यादातर विभागों के अधिकारियों को इस बात का नहीं पता कि उनके विभाग का राज्य जन सूचना अधिकारी कौन है।
विभाग यह भी नहीं बता पाए कि उनके राज्य सूचना अधिकारी ने इस एक्ट के संबंध में किसी भी तरह की ट्रेनिंग ली हुई है या नहीं। मंडोरा को मिली जानकारी के मुताबिक, कुल 68 विभागों में से एक-दो को छोड़कर अधिकतर विभागों को मालूम नहीं है कि आरटीआई में संबंधित विभाग का प्रथम अपीलीय अधिकारी कौन है और उसका कार्यालय कहां है।
उपायुक्त ऑफिस से जवाब मिलने के बाद राहुल मंडोरा ने कहा कि जिला स्तरीय अधिकारियों के लापरवाह होने के कारण आरटीआई का मखौल उड़ रहा है। आरटीआई का पर्याप्त ज्ञान नहीं न होने के कारण प्रार्थी को समय पर सही सूचना नहीं मिल पाती और वह प्रथम अपील लगाता है। प्रथम अपील में भी उन्हें सूचना नहीं मिल पाती तो राज्य सूचना आयोग को अपील करनी पड़ती है। लेकिन इस दौरान आवेदक को बहुत अधिक समय और पैसे का नुकसान उठाना पड़ता है। राहुल का कहना है कि अब वह उपायुक्त ऑफिस से मिले जवाब की एक-एक प्रति राज्य सरकार, राज्य सूचना आयोग हरियाणा और प्रधानमंत्री को भेजकर देशभर के संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों को इस कानून का प्रशिक्षण देने और इसे गंभीरता से लागू करने की मांग करेंगे।
68 में से 64 विभागों को नहीं पता कि कौन है उनका एसपीआईओ
आरटीआई एक्ट में अधिकारियों की रुचि नहीं
-68 में से 64 विभागों को नहीं पता कि कौन है उनका एसपीआईओ