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स्वच्छता सर्वे: नप की तैयारियां नहीं पूरी, कट सकते हैं 450 अंक

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स्वच्छता सर्वे: नप की तैयारियां नहीं पूरी, कट सकते हैं 450 अंक
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के लिए आठ जनवरी को टीम शहर पहुंचेगी। यह टीम तीन दिन रुकेगी और शहर की स्वच्छता संबंधी नब्ज टटोलेगी। मौजूदा हालातों के मद्देनजर शहर के सर्वे में 450 अंक कटने का अनुमान है। इसका कारण नगर परिषद की आधी अधूरी तैयारियां हैं। टीम के आने में महज चार दिन बचे हैं और नगर परिषद ने अब तक खामियों को दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठाई है। ऐसे में शहर की रैंकिंग भी गिरने के कयास लगाए जा रहे हैं और इसका कारण अधिकारियों का ढुलमुल रवैया है।
वैसे तो शहर में कचरा उठान से लेकर इसे डंपिंग प्वाइंट तक डालने के पुख्ता प्रबंध न होने से सफाई व्यवस्था ज्यादातर पटरी से उतरी रहती है। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो नप अधिकारियों ने इस मामले में गंभीरता दिखाई है। शहर के वार्डों से नियमित कूड़े का उठान किया जा रहा है। बाजारों से कूड़ा उठान में अभी भी दिक्कतें हैं और इसका कारण नप के पास संसाधनों की कमी होना है। नप कार्यालय में ईओ से लेकर ट्रैक्टर-ट्राली के चालकों तक के पद खाली हैं। बिल्डिंग ब्रांच में भी कर्मचारियों की कमी से काफी हद तक कामकाज प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के कई मानक शहर में अभी पूरे नहीं हो रहे हैं। इसके चलते शहर को मिलने वाले अंकों में गिरावट आने की संभावना है। सर्वे टीम शहर को कुल 1400 अंकों में से नंबर देगी और इसके बाद ही शहर की स्वच्छता रैंकिंग तय की जाएगी। अमर उजाला ने सर्वे से पहले शहर की व्यवस्थाओं की बुधवार को धरातल पर जांच की। अमर उजाला टीम ने दो घंटे में सर्वे के अंकों से संबंधी एक दर्जन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान नौ बिंदुओं पर नगर परिषद की तैयारियां आधी अधूरी पाई गईं। यहां तक कि स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के लिए नगर परिषद अधिकारियों ने ब्रांड एंबेसडर तक की अभी तक नियुक्त नहीं किया है। इसके अलावा सार्वजनिक शौचालयों की दशा अभी नहीं सुधारी गई है। डंपिंग प्वाइंट पर भी स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे संबंधी बैनर नहीं लगवाया गया है। इसके अलावा नगर परिषद ने अभी तक शहर में बिन (रंगीन डस्टबिन) नहीं रखवाए हैं। वहीं, नप सफाई कर्मियों के पास भी स्वच्छता संबंधी सारे संसाधन नहीं हैं। पब्लिक फीडबैक भी शहर की रैंकिंग गिरने का प्रमुख कारण बन सकता है। अमर उजाला टीम ने इस व्यवस्था पर शहर के अलग-अलग वार्डों के लोगों से बातचीत की तो वर्तमान सफाई व्यवस्था से ज्यादातर नाखुश ही नजर आए। इनके अलावा कुछ पार्षद भी कचरा उठान और सफाई व्यवस्था से खुश नजर नहीं आ रहे। वहीं, सर्वे के दौरान टीम को कूड़े का ढेर नजर आने पर 30 अंक कट जाएंगे। इसके अलावा शौचमुक्त शहर न मिलने पर भी 100 अंक टीम काट लेगी। नप सूत्रों की मानें तो ये दोनों खामियां ही मौजूदा समय में शहर में व्याप्त हैं।
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यहां गंवाने पड़ सकते हैं अंक
ब्रांड एंबेसडर बनाने भूले, कटेंगे छह अंक
स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे से पहले नगर परिषद अधिकारियों को एक ब्रांड एंबेसडर भी बनाना था लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया है। नप सूत्रों ने बताया कि ब्रांड एंबेसडर कोई खिलाड़ी, मेधावी छात्र या सामाजिक संगठन का कोई पदाधिकारी हो सकता है। बता दें कि ब्रांड एंबेसडर के लिए जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के खिलाड़ी हैं लेकिन अब तक नप अधिकारियों ने इनमें से किसी का चयन करने जहमत नहीं उठाई है। इस लापरवाही पर स्वच्छता सर्वे रिपोर्ट कार्ड में छह अंक कट सकते हैं।

डंपिंग साइट पर व्यवस्था नहीं होने से कटेंगे 150 अंक
डंपिंग प्वाइंट पर भी तमाम व्यवस्थाएं करना नगर परिषद के स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे में शामिल बिंदु है। इसके तहत डंपिंग प्वाइंट पर एक बड़ा बैनर भी लोगों को स्वच्छता बारे जागरूक करने के लिए लगाना जरूरी है। अगर डंपिंग प्वाइंट की व्यवस्थाएं सर्वे टीम को पूरी नहीं मिली तो इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। अगर डंपिंग प्वाइंट के मौजूदा हालातों की बात करें तो नगर परिषद सूत्र यहां 150 अंक कटने का अंदेशा जाहिर कर रहे हैं।

आमजन का फीडबैक कटवा सकता है 30 अंक
स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे टीम आठ, नौ व 10 जनवरी को शहर में रुकेगी और इस दौरान पूरी स्थिति का जायजा लेगी। इस दौरान यह टीम आमजन से भी रूबरू होगी और शहर की स्वच्छता संबंधी फीडबैक लेगी। अगर इस दौरान लोग सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नजर नहीं आए तो यह टीम इसके भी 30 अंक काट लेगी। फिलहाल नगर परिषद की एप पर भी करीब 10 शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है।

रंग-बिरंगे डस्टबिन गायब, 30 अंकों की पड़ेगी मार
शहर में ठोस व तरल कचरे के लिए नगर परिषद को शहर में रंग-बिरंगे डस्टबिन रखाने थे लेकिन अब तक ऐसा नजर नहीं आया है। शहर के प्रमुख बाजार और सभी वार्ड इससे अछूते हैं। नगर परिषद ने अब तक रंगीन डस्टबिन खरीदने के लिए कोई प्रक्रिया ही शुरू नहीं की है। इस खामी पर 30 अंक कटेंगे और शहर की स्वच्छता रैंकिंग में भी गिरावट आएगी। वहीं, वार्ड पार्षद इनकी मांग कर चुके हैं लेकिन यह मांग अधूरी ही है।

सफाई कर्मियों के पास नहीं संसाधन, 18 अंक मिलेंगे कम
नगर परिषद के पास इस समय करीब 150 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें करीब 90 कर्मचारी पक्के हैं और 60 कर्मचारी कांट्रेक्ट बेस पर लगाए गए हैं। सभी कर्मचारियों के पास न तो सफाई रेहड़ी है और न ही ड्रेस है। इन कर्मचारियों को कूड़ा उठान के दौरान संक्रमण से बचाने के लिए ग्लब्ज तक मुहैया नहीं कराए गए हैं। इस अव्यवस्था पर भी 18 अंक कटने तस है। वहीं, नप सूत्रों ने बताया कि सफाई कर्मचारी झाड़ू तक अपनी जेब से खरीद रहे हैं।

पब्लिक कनेक्टिविटी में पीछे अधिकारी, चार अंक की पड़ेेेगी मार
स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के मानकों अनुसार नप अधिकारियों को शहर की स्वच्छता को लेकर 16 अलग-अलग संगठनों से बैठक करनी थी। लेकिन तय समयावधि तक अधिकारी केवल रेहड़ीधारकों, स्कूल संचालकों, व्यापार मंडल सहित चार संगठनों के पदाधिकारियों के साथ ही बैठक कर पाए और इसकी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी। इस रिपोर्ट के आधार पर 12 अंक ही मिलने की उम्मीद है जबकि तय मानक पूरे होने पर इसके 16 अंक मिलने थे।

दूसरे शहर की विजिट में नहीं ली दिलचस्पी, गंवाने पड़ेंगे 16 अंक
यूएलबी (अर्बन लॉकल बॉडी) यानी नगर परिषद अधिकारी को शहर की स्वच्छता में सुधार करने के लिए किसी बड़े शहर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेना था। लेकिन नगर परिषद अधिकारी यहां भी पीछे रहे। नप का कोई अधिकारी किसी बड़े शहर का मुआयना करने नहीं गया और अब इसके चलते 16 अंक गंवाने पड़ सकते हैं।
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वर्जन::
जो खामियां हैं उन्हें हम दुरुस्त करने का प्रयास कर रहे हैं। टीम के पहुंचने से पहले ही प्रबंध पुख्ता कर दिए जाएंगे। शहर की सफाई व्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा सुधार के लिए हम प्रयासरत हैं। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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