अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
शिक्षा विभाग द्वारा 25 दिसंबर से आठ जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है। विभाग ने आदेशों में प्रदेशभर के निजी व सरकारी स्कूलों में अवकाश रखा जाना निश्चित कर रखा है। सरकारी स्कूलों में तो इन आदेशों की पालना तुरंत प्रभाव से हो चुकी है। लेकिन निजी स्कूल शिक्षा विभाग के आदेशों को कुछ नहीं समझ रहे। बुधवार को आदेशों की पड़ताल करने के लिए अमर उजाला के दो संवाददाता सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 10 निजी स्कूलों के द्वार तक गए। इस दौरान अमर उजाला टीम ने पाया कि शहर के पांच निजी स्कूल बंद हैं तथा शहर से सटे ग्रामीण आंचल के पांच निजी स्कूल खुले हुए हैं। इससे साफ हो रहा है कि शिक्षा विभाग के डंडे का डर केवल शहर के स्कूल संचालकों को ही है। शहर से सटे गांवों में चल रहे निजी स्कूलों को विभाग की कार्रवाई का कोई भय नहीं है।
बच्चे ठंड में ठिठुरते जाते हैं स्कूल
अमर उजाला टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि बच्चे सुबह ठंड में ठिठुरते हुए स्कूलों की ओर जा रहे हैं। हैरानी भरी बात तो यह है कि काफी स्कूलों के पास परिवहन की सुविधा ही पर्याप्त नहीं है। इसके चलते बच्चे निजी वैन या ई-रिक्शा में स्कूल तक पहुंचते हैं। वहीं, टीम ने बच्चों से छुट्टी को लेकर बात की तो अधिकांश बच्चों ने छुट्टी करवाने के लिए फोटो करवाने में हिचक नहीं दिखाई।
निजी स्कूल नहीं मानते विभागीय नियम
शिक्षा विभाग का निजी स्कूलों के प्रति कार्रवाई का रवैया इतना नरम है कि निजी स्कूलों को कार्रवाई का कोई भय नहीं सताता। नियम-134 ए लागू करने की बात हो या फिर बिना फार्म-6 जमा करवाए फीस बढ़ाने की बात हो। निजी स्कूल पूरी तरह से अपनी मनमानी करते हैं। वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि सरकार के पक्ष पर जाकर मामला निपट जाता है और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके चलते उन्हें शिक्षा विभाग के डंडे की जरा भी परवाह नहीं है।
वर्जन
स्कूलों को बंद करवाने के लिए सभी बीईओ को पत्र लिख दिया है। वीरवार को विभाग की टीमें स्कूलों में चेकिंग अभियान चलाएंगी। अगर कोई स्कूल खुला मिला तो उसे नोटिस देकर तलब किया जाएगा तथा स्कूल की तुरंत छुट्टी करवाई जाएगी।
- सतबीर सिवाच, डीईओ, झज्जर।