अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। जिला मुख्यालय पर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली होने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा गर्भवती महिलाओं के अलावा अन्य मरीजों को भी नहीं मिल पा रही थी। अब विभाग ने सरकार की योजना के तहत शहर के तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों से टाईअप किया है। इनमें से दो केंद्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा देने को तैयार हैं जबकि तीसरे के भी जल्द सहमति जताने की उम्मीद है। जिला मुख्यालय पर सिविल अस्पताल के अलावा तीन केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध होने से गर्भवती महिलाओं की परेशानी कम हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के बाढड़ा, बौंदकलां व झोझूकलां सीएचसी में भी अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होने से महिलाओं को करीब 45 से 50 किलोमीटर का सफर तय कर शहर तक आना पड़ता है। यहां भी सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी की वजह से महिलाओं को निजी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
पिछले तीन माह से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली होने से जिला मुख्यालय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन बंद कक्ष में यह धूल फांक रही है। हालांकि इससे पहले भी सप्ताह में महज दो दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पाते थे। अब यह सेवा बिल्कुल बंद होने से गर्भवती महिलाओं को अपने खर्च पर ही अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को लग रही आर्थिक चपत को देखकर स्वास्थ्य विभाग ने तीन निजी केंद्रों के साथ टाईअप करने की योजना बनायी। इसे डीसी अजय सिंह तोमर भी हरी झंडी दे चुके हैं। दो निजी केंद्र संचालक तैयार भी हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो एक सप्ताह के अंदर यह सुविधा शुरू हो जाएगी और तब अल्ट्रासाउंड की फीस गर्भवती महिलाओं के परिजनों से नहीं ली जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार सिविल अस्पताल में दैनिक ओपीडी 450 की है। इसमें गर्भवती महिलाओं की संख्या प्रतिदिन 50 के पार है। इन महिलाओं को गर्भावस्था में दो से तीन बार अल्ट्रासाउंड कराना होता है। जिला मुख्यालय अस्पताल के अलावा तीनों सीएचसी में तो ये सुविधा पिछले लंबे समय से गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रही है। इस कारण बाढड़ा उपमंडल के अलावा बौंदकलां व झोझूकलां क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं भी जिला मुख्यालय अस्पताल पर ही निर्भर हैं। चेकअप के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड अपने खर्च पर करवाना पड़ रहा था। इसके लिए उन्हें निजी केंद्रों पर 400 से 450 रुपये चुकाने पड़ते हैं। इस लिहाज से पिछले तीन माह से गर्भवती महिलाओं के परिजन प्रतिदिन 17 हजार रुपये सरकारी तंत्र की कमी के चलते चुकाने को विवश हैं। इस समस्या के मद्देनजर सीएमओ विरेंद्र यादव ने शहर के तीन प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ टाईअप करने की योजना तैयार की। डीसी अजय सिंह तोमर ने भी इसे एप्रूवल दे दी है।
सिविल अस्पताल से मिलेगी पर्ची
स्वास्थ्य विभाग ने जो योजना बनाई है उसके मुताबिक सिविल अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंची गर्भवती महिला के अगर अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत है तो उसे यहां एक पर्ची थमाई जाएगी। इस पर्ची को ले जाकर इस पर लिखे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर देनी होगी। इसके बाद उक्त महिला का वहां अल्ट्रासाउंड किया जाएगा और वहां कोई फीस नहीं ली जाएगी। इन अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सीधा सरकार भुगतान करेगी।
रिपोर्ट भेजने के तरीके पर चल रहा विचार-विमर्श
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सीधा गर्भवती महिला को दी जाएगी या फिर शाम के समय सीधा सिविल अस्पताल भेजी जाएगी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है और दो-तीन दिन में जब टाईअप फाइनल होगा तब इस पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। पर्ची थमाते समय महिला या परिजनों को अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट संबंधी जानकारी दे दी जाएगी।
डॉ. राज दिसौदिया बने एसएमओ, बंद हुआ अल्ट्रासाउंड
सिविल अस्पताल में भिवानी से एमओ डॉ. राज दिसौदिया अल्ट्रासाउंड करने आते थे। वह सप्ताह में दो दिन ही चरखी दादरी में अपनी सेवाएं देते थे। करीब तीन माह पहले उन्हें प्रमोट कर बवानीखेड़ा एसएमओ बनाया गया था। उनके पदभार संभालते ही चरखी दादरी जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा भी बंद हो गई थी।
सीएमओ ने मुझे इस योजना के बारे में बताया था। इससे गर्भवती महिलाओं को सुविधा मिलेगी। जल्द ही इस सेवा को हम शुरू करवा देंगे। - अजय सिंह तोमर, डीसी
दो प्राइवेट केंद्रों के साथ हमारी बातचीत हो चुकी है और जल्द ही यह सेवा हम शुरू कर देंगे। इसके तहत गर्भवती महिलाओं के परिजनों को भुगतान नहीं करना पड़ेगा। - विरेंद्र यादव, सीएमओ