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झोझूकलां क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन की एनजीटी ने दो माह में रिपोर्ट की तलब

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चरखी दादरी। झोझूकलां में चल रहे अवैध खनन पर एक अधिवक्ता की याचिका पर संज्ञान लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वन विभाग के सचिव को संयुक्त टीम का गठन कर मौके का जायजा लेने के आदेश दिए हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध खनन रोकने के लिए कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के भी आदेश दिए हैं। संयुक्त टीम में प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड, वन विभाग व खनन अधिकारी और जिला उपायुक्त को शामिल कर मौका देखने के आदेश दिए हैं। वहीं, याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने कुछ राजनेताओं की इस काम में संलिप्तता का अंदेशा जाहिर किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दो माह में रिपोर्ट तलब की है।
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अधिवक्ता विनोद जांगड़ा ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा झोझूकलां क्षेत्र में अवैध खनन करके पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई कर ट्रिब्यूनल ने हरियाणा सरकार के वन विभाग सचिव को आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि इन आदेशों में कहा गया है कि विभिन्न विभागों से एक संयुक्त टीम बनाकर मौके का जायजा लिया जाएं और कानूनी रूप से उचित कदम उठाए जाए।
अधिवक्ता विनोद जांगड़ा ने बताया कि झोझू कलां के साथ लगती लंबी पहाड़ी पर खनन माफियाओं द्वारा अवैध खनन के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। लंबी पहाड़ी के इर्द-गिर्द वन विभाग की छह एकड़ जमीन पर वन विभाग ने विभिन्न योजनाओं के तहत काफी अरसा पहले पौधरोपण किया था। खनन माफियाओं ने वन विभाग व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से काफी संख्या में पेड़-पौधे काटकर पत्थर ढोने वाले वाहनों के लिए रास्ता बना दिया। इतना ही नहीं करीब तीन-चार दशक पहले लंबी पहाड़ी के साथ-साथ बरसाती पानी के लिए बनाए लगभग 15 फुट चौड़ा और 10 फुट गहरे नाले को भी मिट्टी से बंद कर वाहनों के लिए रास्ता बना दिया गया। अधिवक्ता ने बताया कि करीब 200 पेड़ों की कटाई कर अवैध रूप से बेच दिया गया और अपने निजी इस्तेमाल के लिए पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया।
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सरकार व विभागों ने नोटिस का नहीं दिया था जवाब
अधिवक्ता विनोद कुमार जांगड़ा ने पर्यावरण को बचाने और अवैध खनन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार के साथ-साथ विभिन्न विभागों को नोटिस दिया था लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान दिया। इसके बाद दिल्ली नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में उन्हें याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता को यह अंदेशा भी है जो टीम गठित की गई है वह सही रिपोर्ट और तथ्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को नहीं देगी।
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