बहादुरगढ़। श्रमिक नेता हरिप्रकाश ने बताया कि केंद्रीय मजदूर संगठन ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) का 22वां अखिल भारतीय सम्मेलन उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में 15 से 17 दिसंबर 2024 तक होगा। खुला अधिवेशन 15 दिसंबर को होगा।
इसमें लगभग 26 प्रदेशों के श्रमिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। हरियाणा के विभिन्न जिलों से कारखाना मजदूर, निर्माण मजदूर-कारीगर, टेक्स्टाइल, आटोमोबाइल, मैनुफैक्चरिंग, रेलवे, रोडवेज, बिजली, पीडब्ल्यूडी, पब्लिक हेल्थ, आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे-मील कर्मियों, ग्रामीण चौकीदार, सफाई कर्मचारी व ठेका श्रमिक यूनियनों के करीबन 70 प्रतिनिधि भागीदारी करेंगे।
हरिप्रकाश ने बताया कि प्रदेश के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन पिछले 10 वर्षो से रिवाइज नहीं किया गया है। इसे बार-बार लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में महंगाई के हिसाब से श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 28,000 रुपए मासिक बनता है। परंतु सरकार सरमायेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए इसे रिवाइज न कर श्रमिक, कर्मचारियों के हकों को दबा रही है। धन की कमी का विलाप कर सरकार आंगनबाड़ी कर्मियों, मिड-डे-मील कुक व आशा कार्यकर्ताओं को भी न्यूनतम वेतन देने के लिए राजी नहीं है। वे सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने के लिए लंबे समय से संघर्ष करती आ रही हैं। सरकार उन्हें अपना श्रमिक तक नहीं मानती है।
भवन निर्माण मजदूर-कारीगरों के पंजीकरण व हित लाभ देने पर सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगाई हुई है। उन्हें नाजायज ढंग से उनके हकों से वंचित किया जा रहा है। मनरेगा मजदूर, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, ग्रामीण चौकीदार व अन्य श्रमिकों को उनके हक नहीं दिए जा रहे।
सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण कर कौड़ियों के भाव सस्ते में उन्हें सरमायेदारों को सौपा जा रहा है। बिजली, पानी, परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा, पब्लिक हेल्थ आदि सभी को मुनाफाखोरी के अंदाज से संचालित कर प्रदेशवासियों को लूटा जा रहा है। सरकारी पद खाली पड़े हैं। उन पर स्थाई भर्ती करने की बजाय ठेका, आउटसोर्सिंग, कैजुअल, सक्षम, कौशल रोजगार आदि के माध्यम से अल्प अवधि या कच्चे कर्मचारियों के रूप में नियुक्त कर उनका शोषण किया जा जा रहा है। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल नहीं की जा रही।