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10 माह बाद हुई थी जिला परिषद हाऊस की मीटिंग, अधिकारी नहीं पहुंचे तो अब 15 दिन बाद फिर होगी 19-05-40

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर। प्रदेश सरकार भले ही जिला परिषद को पावर देने की बात कर रही है लेकिन हकीकत तो यह है कि प्रशासनिक अधिकारी ही जिला परिषद को बॉडी को कुछ नहीं समझते। झज्जर जिला परिषद की 10 माह बाद मंगलवार को मीटिंग हुई लेकिन अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। मीटिंग में केवल दो बीडीपीओ व एक जेई ही पहुंचे। इससे गुस्साए पार्षदों ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिप सीईओ से नोटिस भेजने की सिफारिश की है। इस पर जिप सीईओ की ओर से मीटिंग में शामिल नहीं होने वालों को नोटिस भेजने और 15 दिन बाद फिर से हाउस की बैठक बुलाने की बात कहीं। मीटिंग में जिप सीईओ शिखा, चेयरमैन परमजीत सौलधा, वाइस चेयरमैन योगेश सिलानी, पार्षद प्रदीप अहलावत, उपेंद्र कादियान, हरेंद्र सिलाना, नसीब मातनहेल, रजनेेश दुल्हेड़ा सहित 18 पार्षद मीटिंग में मौजूद रहे। वहीं वार्ड 11 से महिला पार्षद मोनिका देवी मीटिंग में नहीं पहुंच सकी।

नहीं उठ सके जनता के मुद्दे
मीटिंग में अधिकारियों के न पहुंचने के कारण जनता के मुद्दों को पार्षद नहीं उठा पाए। पार्षद नसीब मातनहेल ने बताया कि उनके गांव में दो किलोमीटर तक गंदा पानी भरा है। वहीं पार्षद हरेंद्र सिलाना ने बताया कि उनके वार्ड के गांव पाटौदा में जल निकासी की बड़ी समस्या है। अधिकारियों के मीटिंग में नहीं आने के कारण वे मुद्दों को उठा ही नहीं पाए। अगली मीटिंग में मुद्दों को उठाया जाएगा।
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ग्रांट वितरण पर हुई चर्चा
मीटिंग में केवल ग्रांट वितरण पर ही चर्चा हो पाई। जिप सीईओ शिखा ने हाउस को बताया कि जिप के खाते में एक करोड़ 71 लाख रुपये की ग्रांट आई हुई है, जिसका वितरण किया जाए। जिस पर हाउस ने ग्रांट वितरण की जिम्मेदारी जिप चेयरमैन परमजीत को सर्वसम्मति से सौंपी।

जैव विविधता कमेटी का होगा गठन
जिला परिषद द्वारा अब जैव विविधता कमेटी (बीएमसी) का गठन किया जाना है। जिस पर हाउस की मीटिंग में चर्चा हुई। बीएमसी में सात लोगों को शामिल किया जाएगा। बीएमसी में एक सदस्य को बतौर चेयरमैन, दो को सचिव तथा दो महिला सदस्य, एक एससी-एसटी सदस्य तथा दो साधारण सदस्य को शामिल किया जाना है। बीएमसी के कार्यों में जैव विविधता शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देना, विरासत स्थलों, वृक्षों, पशुओं, पवित्र वनों एवं पवित्र जल निकायों का प्रबंधन, स्थानीय जैव विविधता की पूर्व अवस्था बहाली तथा लोक जैव विविधता रजिस्टर तैयार करना शामिल हैं।

पार्षद प्रदीप ने तीन साल का भत्ता पीएम राहत कोष में दिया
मानदेय बढ़ाने के लिए अक्सर जनप्रतिनिधि जहां सरकार मांग करते रहते हैं। वहीं डीघल से जिला पार्षद प्रदीप अहलावत ने अपने तीन साल के भत्ते प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजने की घोषणा कर ऐसे लोगों के लिए नजीर बने हैं। उन्होंने मीटिंग के दौरान जिप सीईओ शिखा को लिखित में दिया कि उनके तीन साल के भत्ते को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवा दिया जाए।
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मीटिंग में अधिकारियों का नहीं शामिल होना गंभीर विषय है। इस मामले को पंचायत मंत्री ओपी धनखड़ के सामने रखा जाएगा। अगर मीटिंग में इस तरह से अधिकारी शामिल नहीं होंगे तो क्षेत्र की जनता की समस्याओं का निदान किस प्रकार होगा। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिफारिश की जाएगी।
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योगेश सिलानी, वाइस चेयरमैन।
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मीटिंग में बादली व मातनहेल के बीडीपीओ व एक जेई शामिल हुए। पंचायती राज के एक्सईएन भी मीटिंग में शामिल नहीं हुए, जिन्हेें मुख्यत: सभी कार्यों को पूरा करवाना होता है। मीटिंग में शामिल नहीं होने वाले अधिकारियों को नोटिस भेजा जाएगा। वहीं अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण अब मीटिंग 15 दिन बाद फिर से बुलाई जाएगी।
शिखा, जिप सीईओ, झज्जर।
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