फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला इंपैक्ट: सिविल अस्पताल में पहुंचे एंटी रैबिज इंजेक्शन, बाहर नहीं लेना पड़ेगा महंगा उपचार

विज्ञापन
विज्ञापन
आखिर छह माह बाद सिविल अस्पताल में पहुंचे एंटी रेबीज इंजेक्शन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में करीब छह महीने इंतजार के बाद 600 एंटी रेबीज इंजेक्शन की खेप पहुंची है। अब मरीजों को सेवाएं मिलनी भी शुरू हो गई हैं। सिविल अस्पताल में तकरीबन हर दूसरे दिन बंदर व कुत्ते के काटे जाने का मामला सामने आ रहा है। सिविल अस्पताल में इंजेक्शन न होने की वजह से पीड़ित को महंगा निजी उपचार लेना पड़ रहा था। प्राइवेट तौर पर एक इंजेक्शन 400 रुपये में मिलता है। अमर उजाला ने गत आठ मई के संस्करण में दस दिन में शहर के सात लोगों को बंदरों ने काटा, सिविल अस्पताल में नहीं है एंटी रेबीज इंजेक्शन नामक शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद जिला उपायुक्त ने भी जल्द ही सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक मंगाने का आश्वासन दिया था।
पिछले करीब पांच- छह माह से नगर के सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन आउट ऑफ स्टॉक थे। इस वजह से लोगों को मोटी आर्थिक चपत लग रही थी। शहर में बंदरों से काटे जाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दिनो बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाया गया था लेकिन सारे बंदर नहीं पकड़े जा सके। शहर के सभी वार्डों और बाजारों में बंदरों ने आतंक मचा रखा है। बंदरों व कुत्तों के काटे जाने के हर माह औसतन 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं। इसी प्रकार शहर में घरों में पालतू व अन्य कुत्तों द्वारा लोगों को काटे जाने के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन


पांच दिन का होता है इसका कोर्स
जिस व्यक्ति को बंदर या कुत्ता काट लेता है उसे एंटी रेबीज के पांच इंजेेक्शन लगवाने होते हैं। यह पांच इंजेक्शन का कोर्स पूरा करना होता है ताकि भविष्य में व्यक्ति के शरीर में किसी प्रकार की कोई अन्य बीमारी न बढ़ने पाए। पूरा कोर्स बाहर से लेने पर मरीज को दो से ढाई हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं। सामान्य श्रेणी के लोगों को सिविल अस्पताल में यह पूरा कोर्स करीब 500 रुपये में मिल सकेगा।
विज्ञापन

बीपीएल श्रेणी को मिलेगा फ्री में
यह इंजेक्शन बीपीएल श्रेणी के लोगों को फ्री में उपलब्ध होगा जबकि सामान्य वर्ग के लोगों को इसका 100 रुपये चार्ज देना होगा। पिछले करीब छह माह से यह इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध न होने की वजह से पीड़ित लोगों को प्राइवेट तौर पर इंजेक्शन महंगे दामों पर लगवाना पड़ता था। पिछले दिनों से इस इंजेक्शन की मांग लगातार बढ़ती आ रही है। कई बार तो बाजारों में भी केमिस्ट की दुकान पर भी इंजेक्शन नहीं मिल पाते।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें