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मेट्रो की यार्ड लाइन के निर्माण को हुडा के सीनियर अधिकारियों ने किया दौरा

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
मेट्रो की यार्ड लाइन के निर्माण को लेकर बुधवार को हुडा के सीनियर अधिकारियों ने बहादुरगढ़ का दौरा किया। मेट्रो की ओर से एनएचएआई के साथ मिलकर प्रोजेक्ट में तब्दीली कर इस यार्ड लाइन का निर्माण जल्द से जल्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पूर्व में इसके लिए जमीन की पैमाइश की गई थी और मौके पर निशान भी लगाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले हुडा के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को यहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले यह अधिकारी मौका देखना चाहते थे। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि एनएचएआई और मेट्रो की जमीन की पैमाइश कर यह पता लगाया जा रहा है कि यहां पर जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही इस प्रोजेक्ट को पूरा कैसे किया जा सकता है।
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गौरतलब है कि मेट्रो यार्ड लाइन के लिए करीब ढाई हजार से अधिक वर्ग गज जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, लेकिन जमीन के मुआवजे का पेंच फंसने की वजह से अब तक यहां पर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सका। हाईकोर्ट के फैसले के बाद एचएसवीपी के अधिकारियों ने स्थानीय भू-मालिकों से बातचीत कर रेट तय किए थे, लेकिन सरकार इन रेटों पर भी यह जमीन लेने को तैयार नहीं है और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। 94 फीसद काम हुआ पूरा हो चुका है। मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो लाइन का अब तक करीब 94 फीसद ही काम पूरा हुआ है। काम में पूरी तेजी लाई जा रही है। इस लाइन पर काम पूरा होने की डेडलाइन अप्रैल 2018 घोषित कर रखी है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार व्यापारियों के मांगें अनुसार मुआवजा नहीं दे पा रही इस कारण अब मुआवजे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले एक दौरा करने आए थे।
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मेट्रो के फेज तीन के तहत मुंडका से बहादुरगढ़ के बीच बनाए जा रहे नए सेक्शन पर मेट्रो का ट्रायल रन अब तेजी से चलने लगा है। पर यहां सेक्टर-9 में मेट्रो यार्ड की लाइन तैयार नहीं होने के कारण इस बेल्ट में कॉरिडोर पैसेंजर्स के लिए कब खुलेगा, इस बारे में डीएमआरसी भी यकीन के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। इसके पीछे कारण है कि सेक्टर-9 यार्ड के लिए मिलने वाली जमीन पर सरकार अभी तक कोई हल नहीं निकाल पाई है। यहां हुडा विभाग ने मेट्रो को जमीन अधिग्रहण करके देनी थी जिसके लिए हुडा विभाग ने सर्वे किया तो हाईवे के शोरूमों को खेत की जमीन मानते हुए यहां की शोरूमों का मुआवजा खेतों के हिसाब से तय कर दिया। इसके विरोध में व्यापारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया। अब एक बार फिर से हुडा विभाग ने जमीन का अधिग्रहण करने की तैयारी शुरू की है पर व्यापारियों का कहना है कि यहां एक बार फिर से हुडा अधिकारी नए-नए पेंच फंसाने की तैयारी में जुट गए हैं, जिससे मेट्रो के यार्ड की लाइन का काम और देरी से शुरू हो सके। इस कारण वे एक बार फिर से अदालत के द्वार खटखटाने की तैयारी में है।
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