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100 मीटर भी नहीं चली ट्राईसाइकिल, मैकेनिकों के पास पहुंचे दिव्यांग

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
दिव्यांगों के कल्याण के लिए एनटीपीसी पावर कंपनी के द्वारा शनिवार को जहांआरा बाग स्टेडियम में कृत्रिम अंग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर व कृषिमंत्री ओपी धनखड़ ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर दिव्यांगों को उपकरण वितरित किए।
कार्यक्रम में जब मंत्रियों ने दिव्यांगों की योजनाएं गिनवाई तो दिव्यांगों ने खूब तालियां बजाई। लेकिन जब वे मंत्रियों द्वारा दी गई ट्राईसाइकिल लेकर घर के लिए रवाना हुए तो 100 मीटर चलने से पहले ही उन्हें मेकेनिकों के पास जाना पड़ गया। दिव्यांगों के अनुसार अधिकतर ट्राई साइकिल की रीम में खामी है। जिसके चलते वो सही से नहीं चल पा रही। वहीं, कुछ दिव्यांगों ने बताया कि बैटरी चलित साइकिल ऊंचाई वाली सड़क पर काम नहीं कर रही। इसके चलते उन्हें राहगीरों से धक्के लगवाने पड़ रहे हैं। बैटरी चलित साइकिल में सबसे बड़ी खामी ये पाई गई है कि उसमें मैन्युअल का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। जिसके चलते खराब होने या बैटरी खत्म होने पर दिव्यांगों को दूसरे के सहारे की आवश्यकता होगी।
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समिति ने जताया था अंदेशा
नवजीवन दिव्यांग कल्याण समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को जहांआरा बाग स्टेडियम में पहुंचकर उपकरणों का निरीक्षण किया था। जिनमें उन्हें कुछ खामियां नजर आई थी। जिस बारे में समिति के सदस्यों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को भी बताया था। लेकिन उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

इन उपकरणों का हुआ वितरण
शिविर में 1142 दिव्यांगजनों को कृत्रिम उपकरण वितरित किए गए। जिसमें 215 दिव्यांगजनों को बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल और सात दिव्यांगजनों को बैटरी चलित व्हील चेयर, दृष्टिबाधित 153 दिव्यांगजनों को स्मार्ट केन व 108 दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को फोन वितरित किए गए।

सही तरीके से नहीं हुआ वितरण
नवजीवन दिव्यांग समिति के संरक्षक होशियार सिंह व प्रधान पवन जांगड़ा ने बताया कि उन्होंने पहले ही इस बारे में अधिकारियों को बता दिया था। लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकतर दिव्यांगों की ट्राईसाइकिल के रीम में खामियां हैं। जिन्हें ठीक करवाने के लिए कार्यक्रम से निकलते ही दिव्यांगों को मेकेनिकों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, पहले 70 फीसदी दिव्यांगता वालों को बैटरी चलित साइकिल देने की बात कही गई थी। लेकिन वितरण के समय केवल 80 फीसदी दिव्यांगता वालों को ही दी गई। वहीं, बैटरी चलित साइकिल ऊंचाई वाली सड़क पर भी काम नहीं कर रही।
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वर्जन
कार्यक्रम से पहले अमर उजाला टीम ने दिव्यांगों के अंदेशे पर रेडक्रास सचिव महेश गुप्ता से बात की तो उन्होंने कहा कि प्रयोग में आने के बाद ही ट्राई साइकिलों की खामी का पता चल पाएगा। लेकिन कार्यक्रम के बाद खराबी आने के कारण दिव्यांग ट्राईसाइकिलों को मेकेनिकों के पास लेकर पहुंचे तो इस बारे में अमर उजाला टीम ने दोबारा रेडक्रास सचिव से बात की। इस बारे में उन्होंने कहा कि वे तो केवल सहयोग कर रहे थे, कार्यक्रम तो निजी कंपनी का था।
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