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30 करोड़ सीएम घोषणाओं की फाइल चंडीगढ़ में फंसी

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30 करोड़ सीएम घोषणाओं की फाइल चंडीगढ़ में फंसी
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सरकार के पाले में शहरी विकास के प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। करीब 30 करोड़ के इन चार विकासपरक प्रोजेक्टों पर सरकार ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इनमें से दो प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के अनुसार तैयार कराए गए हैं। करीब 22 करोड़ की लागत से सूबे के मुखिया की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने की तैयारियां अधिकारियों ने पूरी कर रखी हैं, लेकिन हेड ऑफिस में फाइलें जाकर जाम हो गई हैं। अब नप अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे इन फाइलों के आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। अगर अब शहर की जरूरतों का जिक्र करें तो दो नए पार्क विकसित करने की प्लानिंग सरकार के उदासीन रवैये के चलते ठंडे बस्ते में पड़ी है। फिलहाल करीब 75 हजार की शहरी आबादी इकलौते रोज गार्डन पर निर्भर है। पार्कों की संख्या में विस्तार करने का मुद्दा कुछ दिन पहने विधानसभा सत्र में भी जोर-शोर से विपक्ष ने उठाया था। शहरी निकाय मंत्री ने श्यामसर तालाब को पर्यटन स्थल में तबदील करने के प्रोजेक्ट पर भी जल्द काम शुरू कराने का तर्क दिया था। नप अधिकारियों द्वारा नक्शा और इस्टीमेट भेजने के बाद भी सरकार कोई दिशा-निर्देश नहीं दे रही है। शहरी विकास की पांच करोड़ की राशि अब तक नगर परिषद को नहीं मिलने से करीब 100 गलियों और सड़कों के निर्माण पर संकट के बादल छाए हैं। पार्षद गलियों के दोबारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं करने को लेकर आक्रोशित है। पार्षदों का दर्द परिषद की बैठक में भी झलका था। नप के अनुसार खस्ताहाल गली या सड़क से संबंधित 35 से 40 समस्याएं अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। पार्षदों के पास आ रही शिकायतों का आंकड़ा इससे पांच गुना अधिक बताया जा रहा है। नप अधिकारी बजट राशि जारी नहीं होने से अटके प्रोजेक्टों की रिपोर्ट दो-तीन दफा डीसी विजय कुमार सिद्प्पा को सौंप चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। अभी भी फाइलें हेड ऑफिस में ही अटकी पड़ी हैं।

30 करोड़ के इन प्रोजेक्टों पर सरकार नहीं दे रही प्रतिक्रिया
प्रोजेक्ट नंबर एक
नियमानुसार नहीं की सीएम ने घोषणा, जो की वो भी नहीं पूरी
करीब सवा साल पहले आयोजित रैली में सीएम ने नगर परिषद को पांच करोड़ रुपये की राशि शहरी विकास के लिए देने की घोषणा की थी जबकि नगर परिषद स्तर पर यह राशि दस करोड़ रुपये है। नप सूत्रों की मानें तो नगर पालिका को विकास के लिए पांच करोड़ की राशि देने का प्रावधान है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सीएम मनोहर लाल ने जो आधी अधूरी घोषणा की उसे भी अब तक अमलीजामा पहनाने की कवायद धरातल पर शुरू नहीं हो पा रही है। इस घोषणा अनुसार शहर की करीब सौ गलियों और सड़कों का निर्माण होना है। फिलहाल प्रमुख गलियों और सड़कों के खस्ताहाल होने से आधा शहर परेशान है। यह प्रपोजल सरकार को भेजे करीब एक साल हो चुका है लेकिन बजट राशि जारी करने का सरकार नाम नहीं ले रही।
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प्रोजेक्ट नंबर दो
17 करोड़ के श्यामसर तालाब प्रोजेक्ट पर भी सरकार सुस्त
सीएम ने बदहाल पड़े श्यामसर तालाब का जीर्णोद्घार करने की घोषणा कर श्रद्धालुओं और शहरवासियों के मन में एक पर्यटन स्थल उपलब्ध कराने की उम्मीद जगा दी थी। सरकार ने इस धरोहर के संरक्षण के लिए बड़ी प्लानिंग नगर परिषद के अधिकारियों कराई थी। सरकार की मांग पर नप ने गुरुग्राम के आर्किटेक्ट को हायर कर तालाब की कायाकल्प कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का खाका तैयार करवाया था। सरकार के दिशा निर्देश के मुताबिक इसके जीर्णोद्घार पर करीब 17 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। इसका इस्टीमेट व नक्शा सरकार को भेजा जा चुका है लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया सरकार ने नहीं दी है।

प्रोजेक्ट नंबर तीन
सात करोड़ से नप कार्यालय और डेढ़ करोड़ से पार्क निर्माण का प्रपोजल भी अटका
सरकार ने हरियाणा स्वर्ण जयंती पर करीब आठ माह पहले डेढ़ करोड़ से पार्क का निर्माण कराने के निर्देश नगर परिषद को दिए थे। इस दौरान नगर परिषद अधिकारियों ने करीब डेढ़ करोड़ से दो पार्क डेवलप कराने का प्रपोजल तैयार कर सरकार को भेजा था। इसके बाद न तो इस प्रोजेक्ट पर सरकार ने कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही पार्क डेवलप कराने के लिए बजट राशि जारी की है। जमीनी हकीकत देखें तो 75 हजार की आबादी के लिए रोज गार्डन काफी नहीं है। विधानसभा सत्र में भी यह मुद्दा उठ चुका है। नगर परिषद ने सात करोड़ से नए कार्यालय का निर्माण कराने की प्लानिंग भी सरकार को करीब डेढ़ माह पहले भेजी है लेकिन इस पर भी कोई जवाब अब तक नहीं मिला है।

बाक्स: लोग बोले: सरकार की सुस्ती आमजन पर पड़ रही भारी
जिला मुख्यालय होने के चलते अब पार्कों की संख्या में विस्तार करना बेहद जरूरी है। एक साल पहले पार्कों की संख्या बढ़ाने की प्लानिंग हुई थी जो अब तक परवान नहीं चढ़ी है। सरकार को आमजन की जरूरतों को देखकर प्रोजेक्ट को मंजूरी देनी चाहिए। - नरेश, वार्ड 10

वार्ड की गलियां पिछले काफी समय से कंडम हाल में पड़ी है। इनके चलते राहगीर परेशान है। अधिकारियों ने करीब एक साल पहले गली निर्माण का आश्वासन दिया था जो अब तक अधूरा है। पूछने जाते हैं तो बजट आने के बाद निर्माण कराने का आश्वासन मिलता है। - छोटूराम, वार्ड 19

जिला मुख्यालय होने की वजह से शहर में तीन-चार पार्क होने चाहिए लेकिन सरकार तो इनकी संख्या एक से बढ़ाकर दो ही नहीं हर रही। पार्क निर्माण के साथ-साथ सौंदर्यीकरण की भी शहर को जरूरत है। नया जिला होने के चलते सरकार को विकासपरक प्रोजेक्ट अटकाने नहीं चाहिए। - सत्यवान, वार्ड दो

शहर की काफी गलियां और सड़क कंडम है। श्यामसर तालाब को पर्यटन स्थल में तबदील कराने की प्लानिंग अच्छी थी लेकिन सीएम घोषणा के बावजूद प्रोजेक्ट पर काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। शहर के सौंदर्यीकरण करने के लिए पर्यटन स्थल होना बेहद जरूरी है। - गोबिंद, वार्ड आठ

वर्जन::
हमने प्रपोजल सरकार को भेज रखे हैं। जैसे ही ग्रांट जारी होगी तुरंत काम शुरू करवा देंगे। हमने टेंडर अलॉटमेंट प्रक्रिया भी पूरी कर रखी है। आला अधिकारियों ने जल्द से जल्द बजट राशि जारी करने का आश्वासन दिया है। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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वर्जन:
यह प्रपोजल कई माह पहले भेजा गया था लेकिन अब तक विकास कार्य शहर में शुरू नहीं हुए। शहर का विकास रुका है। न तो इनकम बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं और न ही विकास का खाका तैयार किया जा रहा है। आधा शहर खस्ताहाल सड़कों से परेशान है। - दीपक श्योराण, उपप्रधान, नगर परिषद
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