झज्जर। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत बनने वाले मकान बजट न मिलने के कारण अटककर रह गए हैं। सरकार की तरफ से कई माह से इसका बजट जारी नहीं किया गया है। प्रशासन की तरफ से चार माह से बार-बार रिमाइंडर लिखे जा रखे हैं, लेकिन अब तक बजट नहीं मिल पाया है। इसके चलते किसी को पहली, किसी को दो ही किस्त मिल पाई हैं।
हालांकि सरकार ने इस योजना को वित्त वर्ष 2028-29 तक बढ़ा दिया गया है। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में 2030 घरों को स्वीकृति मिली थी। इन घरों के निर्माण के लिए करीब 16.89 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता अब तक वितरित की गई है।
वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 2032 घरों का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 2030 घरों को स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृत घरों में से 1250 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, 780 घर अभी निर्माणाधीन हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का विस्तार 2028-29 तक किया गया है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सभी पात्र बेघर परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 1688.70 लाख रुपये की वित्तीय सहायता जारी की गई। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई है। योजना का लक्ष्य ग्रामीण आवास की कमी को पूरा करना है।
किस्तों का वितरण और लाभार्थी
वित्तीय सहायता तीन किस्तों में वितरित की गई है। पहली किस्त के रूप में 1949 परिवारों को 877.05 लाख रुपये दिए गए। प्रत्येक परिवार को 45000 रुपये की राशि मिली। दूसरी किस्त 1311 परिवारों को 786.60 लाख रुपये की दी गई। इस किस्त में प्रत्येक परिवार को 60000 रुपये मिले। तीसरी किस्त 167 परिवारों को 25.05 लाख रुपये की प्रदान की गई। प्रत्येक परिवार को 15000 रुपये की अंतिम किस्त मिली।
अब तक केवल एक किस्त मिली
मुंडाहेड़ा निवासी मंजू देवी ने बताया कि उन्होंने भी योजना के तहत आवेदन किया था। उनका नाम भी शामिल किया गया, लेकिन अब तक केवल एक ही किस्त मिल पाई है। बार-बार चक्कर काटे गए, लेकिन दूसरी व अंतिम किस्त नहीं मिल पाई है। इस कारण हर का काम अधूरा पड़ा है।
वर्जन
पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत बजट की मांग की गई है। अब तक बजट नहीं मिला है। बजट सीधा पात्रों के खातों में जाता है। हमारी तरफ से सभी औपचारिकताएं पूरी करके भेजी जा चुकी हैं।मनीष फौगाट, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद