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भ्रूण हत्या करने वाले परिवार के साथ चिकित्सक का भी होगा सामाजिक बहिष्कार, शादियों में हथियार लाने पर भी रहेगा प्रतिबंध

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चरखी दादरी। एससीआर स्कूल में आयोजित सर्व जातीय और खापीय महापंचायत के मंच से खाप प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों समलैंगिकता, लिव इन रिलेशनशिप, विवाह के बाद भी अन्य से संबंध बनाने की छूट) में संशोधन कराने की मांग की। वहीं, इस महापंचायत की आयोजक सांगवान खाप-40 ने समाजहित की दृष्टि से दो और फैसले लिए हैं। इनमें एक तो विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में हथियार लाने पर पाबंदी लगाने का है तो दूसरा भ्रूण हत्या करने वाले परिवार के साथ चिकित्सक के भी सामाजिक बहिष्कार का है। ये दोनों फैसले खाप ने 11 नवंबर से ही लागू कर दिए हैं। वहीं, सांगवान खाप द्वारा करीब एक माह पहले लिए 10 फैसलों का पूरे उत्तर भारत की 140 खापें भी अनुमोदन करेंगी।
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सांगवान खाप-40 के आह्वान पर उत्तरी भारत की सर्वखापीय महापंचायत रविवार दोपहर सवा 12 बजे शुरू हुई। महापंचायत का मंच संचालन सांगवान खाप सचिव नरसिंह डीपी ने किया। उन्होंने महापंचायत की शुरूआत कर फौगाट खाप प्रवक्ता शमशेर फौगाट को मंच पर आमंत्रित किया। शमशेर फौगाट ने पंचायत की अध्यक्षता के लिए सांगवान खाप प्रधान सोमबीर सांगवान का नाम अनुमोदित किया। इसका समर्थन हवेल खाप ने किया और महापंचायत का अध्यक्ष सोमबीर सांगवान का ही बनाया गया। इसके बाद नरसिंह डीपी ने महापंचायत का उद्देश्य स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि महापंचायत में नौ एजेंडे रखे जाएंगे। सभी खाप प्रतिनिधियों को इन पर ही अपने विचार प्रकट करने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चियों और महिलाओं के साथ बढ़ती दरिंदगी, लिव इन रिलेशनशिप में बच्चे का जन्म होने पर उसे जो कानूनी अधिकार दिए हैं उन्हें निरस्त करना, शादी के बाद पति या पत्नी का अन्य से शारीरिक संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी में रखने, समलैंगिकता की छूट को वापस लेना, खाप से बाहर अंतरजातीय विवाह करने वाले युवक-युवती को मान-सम्मान देना, माता-पिता द्वारा बच्चों को संस्कार देना और खाप पंचायतों के बिगड़ते स्वरूप पर चर्चा करना महापंचायत के एजेंडे हैं।
उन्होंने कहा कि सभी खापों को भ्रूण हत्या के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलना होगा। इसी कड़ी में सांगवान खाप-40 ने फैसला लिया है कि अगर कोई भ्रूण हत्या कराने का मामला सामने आता है तो उक्त परिवार का ही नहीं बल्कि चिकित्सक का भी खाप सामाजिक बहिष्कार करेगी। उन्होंने कहा कि विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रम में मोबाइल और फ्लोर डीजे पर खाप पहले ही रोक लगा चुकी है। अब खाप ने इन आयोजनों में हथियार लाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
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किसी ने बिखरते समाज पर तो किसी ने खापों के बिगड़े स्वरूप पर बयान किया दर्द
- विकृत मानसिकता के लोग भ्रूण हत्या या दरिंदगी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। मेरा सभी खापों से अनुरोध है कि ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएं। सुप्रीम कोर्ट का लिव इन रिलेशनशिप के निर्णय का फायदा उठाकर समाज विरोधी लोग व्यभिचार ही फैलाएंगे।
शमशेर फौगाट, प्रवक्ता फौगाट खाप

-भारत के विवाह की परंपरा आदर्श मानी जाती थी लेकिन अब यह परंपरा धूमिल होती जा रही है। इसका प्रमुख कारण कानूनों में बदलाव करना है। शादी के बाद अन्य से संबंध बनाने का आजादी को अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाए। खापों का स्वरूप दलगत राजनीति ने बिगाड़ा है। - जल पुरुष राजेंद्र, मैगसेसे अवार्डी

-बेटियों के लिए जो काम हरियाणा की पंचायतें करती हैं वो सराहनीय है। ऐसा काम अगर अन्य प्रदेशों की पंचायतें भी करें तो बेटियों को एक अलग मुकाम मिलेगा। मैं झांसी के बुंदेलखंड से हूं तो पिछड़ेपन के चलते जाना जाता है। सांगवान खाप के फैसलों को मैं बुंदेलखंड में लागू कराने का प्रयास करूंगी।
मंजू पाठक, बुंदेलखंड

-समलैंगिकता की आजादी मिलने का जो कानून बना है वो समाज को पतन की ओर ले जाएगा। खापों और सामाजिक ताने-बाने को राजनैतिक पार्टियों ने तोड़ने का काम किया है। महिलाओं की भागीदारी सरकार और खापें जब तक 50 प्रतिशत निर्धारित नहीं करेगी तब तक सशक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। संगीता दहिया, दहिया खाप महिला विंग प्रधान

- इस समय कानून में बदलाव की जरूरत है। प्रदेश का युवा भटककर नशे में अटक गया है। खापों के बिगड़े स्वरूप को सुधारकर ही सभ्य समाज का निर्माण किया जा सकता है। खाप पंचायतों के फैसले कानून की वजह से लागू नहीं हो पाते और समाज विघटन की ओर जा रहा है। - कपूर सहरावत, बिरोहड़-12 प्रधान


- आज की महापंचायत देकर महाराजा हर्षवर्धन का समय याद आ गया। अगर उत्तरी भारत की सभी खापें 9 एजेंडों का अनुमोदन कर दें तो स्वर्ग आ जाए। सरकार को भी स्कूल व कालेजों में नैतिक शिक्षा अनिवार्य रूप से लागू करनी चाहिए। खापों के बिगड़ते स्वरूप के लिए चौधर की लड़ाई छोड़कर एकजुट होना होगा। - रघबीर सिंह, कादयान खाप प्रधान

- खाप पंचायतों की अगर बाते मानी जाती तो न पुलिस कप्तान की जरूरत होती है और न ही थाने-चौकियों की। मैं 304-बी के जो मामले देखता हूं उनमें से 90 प्रतिशत में असली दोषी (सास, ननद) को तो बरी करने की बात सामने आती है जबकि परिवार को जोड़कर रखने की दुहाई देने वाले ससुर को सजा होती है। सब जागरूक होंगे तभी ये घटनाएं रूकेंगी।
धर्मबीर सिंह, सांसद

-हिंदू मैरिज एक्ट 1955 में दिया गया है कि सहपिंडा (तीन पीढ़ी मां की और चार पीढ़ी बाप की) को छोड़कर किसी से विवाह किया जा सकता है जबकि यह समाज के लिए घातक है। इस फैसले को समाज किसी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकता। एक गोत्र में शादी की छूट तक के कानून में संशोधन की जरूरत है। - जोगीराम शोकंद

महापंचायत में सांसद से जुड़ी झलकियां
- सांसद धर्मबीर को संबोधन के बीच में लोगों ने टोका तो माइक छोड़कर मंच पर आ बैठे। बाद में सोमबीर सांगवान ने बात संभालते दोबारा संबोधन के लिए बुलाया।
- सांसद धर्मबीर ने कहा कि आज खाप पंचायतों की कानून ने महत्ता घटा दी है। आज पंचायतों को लेकर लोगों का रुझान इस कदर घट गया है कि बढ़े-बुजुर्ग को पंचायत तक में नहीं जाने देते।
- सांसद धर्मबीर ने अपने संबोधन में कहा कि सोमबीर सांगवान तुम राजनीति छोड़कर खाप प्रतिनिधि बनकर ही समाज सेवा करो। इस नेक काम का भगवान तुझे फल अवश्य देगा।

इन खापों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
प्रधान-84 खाप रोहतक से हरदीप अहलावत, देशवाल खाप प्रधान अजय, प्रधान अठगामा खाप बोहर बलराज नांदल, हुड्डा खाप प्रधान धर्मपाल, दहिया खाप प्रधान सुरेंद्र, ढूल खान प्रतिनिधि धूप सिंह,जखोली-12 खाप प्रधान शहवीर सिंह, सोनीपत खाप-350 प्रधान अशोक खत्री, भुटाना-12 प्रधान राजेंद्र, गुलिया खाप प्रधान जितेंद्र, नरवाल खाप प्रधान भल्लेराम, प्रधान महम चौबीसी मेहर सिंह, किन्हा खाप प्रधान रामकिशन, दलाल खाप-84 प्रधान भूप सिंह दलल सहित 140 खापों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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