अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
वाइल्ड लाइफ विभाग के कर्मचारी काफी दिनों से परेशानी से जूझ रहे हैं। भिंडावास झील के 12 किलोमीटर क्षेत्र की रखवाली करना उनके लिए दुविधा बना हुआ है। वन्य क्षेत्र को पेड़ काटने वालों व पशुओं से बचाने के लिए उन्हें दिन-रात गश्त करनी होती है। लेकिन विभाग के द्वारा कोई वाहन उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा। जिसके चलते सही से न तो गश्त हो रही है और लोगों से भी आए दिन झगड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण पशु चराने वाले भी उनके साथ मारपीट करते हैं। 12 किलोमीटर क्षेत्र में गश्त के लिए केवल दो गार्ड विभाग के पास हैं। जबकि इस जगह पर कम से 6 गार्ड की आवश्यकता है, जो कि तीन शिफ्ट में ड्यूटी दे सकें। लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण कर्मचारी परेशान हैं।
35 हजार पक्षी आते हैं हर साल
भिंडावास वन्य क्षेत्र का दायरा करीब एक हजार एकड़ है, जिसमें से झील का हिस्सा 700 एकड़ है। हजारों मील का सफल तय कर हर साल करीब 35 हजार प्रवासी पक्षी झील पर पहुंचते हैं। झील को प्रदेश की सबसे बड़ी वेटलैंड का भी दर्जा है। यहां के विकास के लिए सीएम मनोहरलाल खट्टर पिछले डेढ़ वर्ष में दो बार दौरा कर चुके हैं लेकिन वो बात अलग है कि अभी तक इस पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है।
कर्मचारियों को पीटते हैं पशु चरवाहे
पशु चराने से रोकने पर आसपास के गांवों के लोग यहां के कर्मचारियों की पिटाई कर देते हैं। 28 मई को भी पशु चराने से रोकने पर विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की कुछ पशु चरवाहों के द्वारा पिटाई कर दी गई। जिसे घायलावस्था में सामान्य अस्पताल में लाया गया। कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया है, लेकिन ऐसे लोग अब फिर से कर्मियों की धमकी देते हैं। वहीं पेड़ों की चोरी-छिपे कटाई के लिए भी इस तरह की वारदात अकसर कर्मियों के साथ होती रहती हैं।
गश्त के लिए गाड़ी नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी आ रही है। वहीं अगर कर्मियों की संख्या भी बढ़ जाए तो समस्या कुछ कम हो सकती है। रात के समय एक गार्ड होने के कारण लकड़ी काटने वालों से खतरा बना रहता है। ऐसे में गार्ड की संख्या व वाहन की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है।
- देवेंद्र हुड्डा, इंस्पेक्टर, वाइल्ड लाइफ, भिंडावास।