जलघरों में चार दिन का पानी शेष, दस दिन बाद नहरें आने की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
बढ़ते तापमान के चलते जहां पेयजल की खपत बढ़ने की संभावना है तो वहीं शहर के मुख्य जलघरों के टैंकों में मात्र चार दिनों का पानी शेष बचा हुआ है। ऐसे में शहरवासियों को गर्मी की शुरूआत पेयजल संकट के साथ करनी पड़ सकती है। अभी नहरी टर्न आने में करीब दस दिन बचे हैं और टैंकों की तलहटी तक पानी पहुंच चुका है। ऐसे में जन स्वास्थ्य विभाग को शहर में पेयजल सप्लाई सोच-समझकर करनी पड़ रही है। वाटर टैंकों में पानी की कमी के चलते विभाग ने एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई शुरू कर दी है।
जलघरों के रिजर्व टैंकों में नहरी पानी केवल चार दिनों का बचा हुआ है। जनस्वास्थ्य विभाग विभाग अब 13 बोरिंग ट्यूबवेलों का सहारा लेकर मिक्स पानी की सप्लाई कर रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो अभी नहरी पानी 10 अप्रैल तक आने की संभावना है। फिलहाल गांव कपूरी और चंपापुरी स्थित जलघरों के टैंकों में बचे पानी से महज चार दिन ही शहर में सप्लाई हो सकती है। पहले जहां माह में 15 दिनों तक नहर में पानी छोड़ा जाता था लेकिन सारणी में बदलाव होने से अक्सर नहरी पानी देरी से मिलता है। जनस्वास्थ्य विभाग ने शहरवासियों के पानी सप्लाई के लिए गांव कपूरी और चंपापुरी में मुख्य जलर बनाए गए है। इसमें कपूरी जलघर के दो टैंकों की क्षमता 115 एमएलडी (मिलियन लीटर) और चंपापुरी में बनाए चार टैंकों की 172 एमएलडी (मिलियन लीटर ) है। शहर में प्रतिदिन पानी की खपत 26 एमएलडी होने से जलघरों के टैंकों क्षमता कम पड़ती है।
13 ट्यूबवेलों का पानी डाला जाता है टैंकों में
शहर में पेयजल सप्लाई पूरी करने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों का पानी टैंकों में डाल कर सप्लाई किया जाता है। ऐसे में विभाग इन ट्यूबवेलों को लगातार चला कर प्रति दिन पांच एमएलडी पानी अलग मिक्स कर सप्लाई कर रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार दोनों जलघरों में बनाए गए 6 रिजर्व टैंक की क्षमता कम रहती है। शहर में प्रतिदिन होने वाली पेयजल सप्लाई को देखते हुए टैंक काफी कम पड़ रहे है।
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समय सारणी के अनुसार लोहारू कैनाल में 10 अप्रैल तक पानी आने की संभावना है। उसके बाद ही टैंकों में पानी भर पाएगा। - राहुल छिल्लर, एसडीओ सिंचाई विभाग
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अभी हमारे पास टैंकों में पानी बचा हुआ है। हम ट्यूबवेलों का भी सहारा ले रहे हैं और शहरवासियों को पेयजल समस्या का सामना नही करना पड़ेगा। - नरेंद्र कुमार, जेई जनस्वास्थ्य विभाग