शहर में बिछाई जाएगी 12 हजार 795 मीटर लंबी पाइप लाइन
चरखी दादरी।
शहर में पीने के पानी की समस्या का समाधान करने के लिए 153 लाख से सभी वार्डों में 12 हजार 795 मीटर लंबी पेयजल लाइनें बिछाई जाएगी। ताकि सभी वार्डों में पानी का समुचित प्रबंध हो सके। इसके लिए पार्षदों की ओर से क्षेत्र को चिंह्नित करवाया गया था। नगर पार्षदों की मांग पर काफी जद्दोजहद के बाद पेयजल लाइनों के लिए तैयार किए गए एस्टिमेट की फाइल पर दूसरी बार लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव कर 11 माह में दूसरी बार हैड ऑफिस भेजा गया है। 29 दिसंबर 2016 को जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के सभी वार्डों में सर्वे कर ये एस्टिमेट तैयार हुआ था। इस सर्वे में हर वार्ड के पार्षद की ओर से गलियों में पेयजल लाइन की डिमांड की गई थी।
शहर के सभी वार्डो में इस समय गली निर्माण व नई पेयजल लाइनों की जरूरत बनी हुई है। सीएम की घोषणा के तहत पांच करोड़ की बजट राशि भी पिछले सप्ताह ही मिली है। चरखी दादरी के जिला बनने के बाद विकास तो हुआ लेकिन यहां कई कॉलोनियां अवैध रूप से विकसित हो गई हैं। इन अवैध कालोनियों में करीब पांच हजार मकान बने हैं। इन लोगों को भी पेयजल व सीवरेज के अलावा सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है। विभाग ने कई अवैध कालोनियों में बिजली व पेयजल लाइनें बिछा भी रखी हैं लेकिन यहां सड़क नहीं बनी हैं। इन भागों में रहने वाले लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा नई एप्रूवड कालोनियों में भी नई पेयजल व सीवरेज लाइनें बिछनी हैं।
पार्षदों की मांग पर करवाई गई थी सर्वे
जनस्वास्थ्य विभाग ने पार्षदों की मांग पर शहर के सभी वार्डों में सर्वे करवाई थी। सर्वे में इन पार्षदों को भी शामिल किया गया था। पार्षदों के साथ विभाग अधिकारियों ने सभी 21 वार्डों की रिपोर्ट तैयार की थी। सर्वे में हर वार्ड में दो से पांच तक गली निर्माण की जरूरत सामने आई पेयजल लाइन के लिए भी काफी गलियों को चिह्नित किया गया था।
विभाग ने तैयार किया था एस्टिमेट
जनस्वास्थ्य विभाग ने एस्टिमेट तैयार किया था। पार्षदों के दवाब के चलते यह प्रक्रिया तीन दिन में ही पूरी कर ली गई थी विभाग ने एस्टिमेट तैयार कर हैड अॅाफिस भेज दिया था।
फरवरी माह में पहली बार लगा ऑब्जेक्शन
विभाग की ओर से भेजी गई एस्टिमेट फाइल पर फरवरी माह में पहली बार ऑब्जेक्शन लगा था। ऑब्जेक्शन के तहत यह निर्देश थे कि किसी गली या पेयजल लाइन को किसी दूसरे प्रोजेक्ट में तो शामिल नहीं कर रखा है ताकि रिपीटेशन न होने पाए। इसके अलावा और भी छोटे-मोटे ऑब्जेक्शन लगाए गए थे।
विभाग ने यह ऑब्जेक्शन रिमूव कर 27 फरवरी 2017 को दोबारा से फाइल हैड ऑफिस भेज दी थी लेकिन नवंबर माह में दूसरी बार इस फाइल पर फिर ऑब्जेक्शन लग गया था। ऑब्जेक्शन में हैड अॅाफिस का तर्क था कि इस एस्टिमेट में शहर के पहले से भेज रखे अन्य एस्टिमेट के कार्य आपस में मेल खाते हैं ऐसे में कई पेयजल लाइनें व कार्य आपस में मेल खा रहे हैं इस स्थिति में इसकी मंजूरी संभव नहीं है।
20 लाख बजट राशि भी घटा दी
हैड ऑफिस ने इस प्रोजेक्ट की बजट राशि को घटाकर 1.73 करोड़ से घटाकर 1.53 करोड़ कर दिया है। अब जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय की ओर से इस फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव कर दिया गया है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट के सभी बिंदुओं की गहनता से स्टडी कर हैड ऑफिस भेज दिया है।
वर्सन--
==इस बारे में जनस्वास्थ्य विभाग के जेई समुद्र सिंह ने बताया कि यह एस्टीमेट रिमूव कर हैड ऑफिस भेज दिया गया है।
वर्सन-
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजे गए रिमूव एस्टिमेट की वे प्रमुखता से पैरवी करवाएंगे। इसे लेकर जल्द ही विभाग के मंत्री से मिलकर इसे मंजूरी दिलवाने की कोशिश करेंगे।
नगर परिषद चेयरमैन, संजय छपारिया