अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। भदानी गांव के शहीद सार्जेंट विक्रांत की मां कांता देवी ने रोते हुए कहा कि उसे अपने बेटे पर गर्व है, जो देश के काम आया है। शहीद विक्रांत का बेटा वरदान अभी डेढ़ साल का है, बड़ा होने पर उसे भी वह आर्मी में देेश सेवा के लिए भेजेगी। कांता देवी को ढाढ़स बंधाने के लिए परिवार की महिलाएं लगी हुई थी, तो उधर शहीद की वीरांगना सुमन को भी घर के लोग समझा रहे थे कि उसका पति देश के काम आया है, उस पर उसे गर्व करना चाहिए। सार्जेंट विक्रांत ने 2005 में इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन की थी। फिलहाल उसकी पोस्टिंग जम्मू के एयर स्टेशन में थी। जहां पर चॉपर क्रैश में वह बुधवार को शहीद हो गया।
टेक्निकल विंग में था विक्रांत
शहीद विक्रांत ने दसवीं तक की पढ़ाई झज्जर के मॉडल संस्कृति स्कूल में की थी। उसके बाद उसने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय झज्जर से 12वीं तक की पढ़ाई की। राजकीय नेहरू पीजी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई करते समय फाइनल ईयर में उसका चयन एयरफोर्स में हो गया। एयरफोर्स ज्वाइन करने के बाद उसने वहीं पर अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की। विक्रांत का चयन एयरफोर्स की टेक्निकल विंग में हुआ था।
सात साल पूर्व हुई थी शादी
दो बच्चों के पिता विक्रांत की शादी सात साल पूर्व हुई थी। पांच साल की बड़ी बेटी काव्या गांव के ही एक निजी स्कूल में पढ़ती है तथा बेटा वरदान अभी डेढ़ साल का है। शहीद विक्रांत के पिता कृष्ण पेशे से किसान हैं तथा विक्रांत का छोटा विशांत इस समय पंजाब की एक निजी कंपनी में कार्यरत है।
तीन माह पहले ट्रांसफर लीव पर आया था घर
शहीद की मां कांता ने बताया कि उसका बेटा विक्रांत तीन माह पहले ही कोयम्बटूर से श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन में ट्रांसफर होने पर ट्रांसफर लीव पर घर आया था। जो कि दो माह पहले ही श्रीनगर में अपनी ड्यूटी पर घर से गया था। कोयम्बटूर में उसके साथ उसके बच्चे भी रहते थे लेकिन इस बार वह घर ही छोड़कर ड्यूटी पर गया था।