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केजरीवाल सवा तीन घंटे लेट पहुंचे, 15 सेकंड गाड़ी से नीचे उतरे और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष जयहिंद को गाड़ी में बैठाकर काफिले के साथ निकल गए

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रदेश के चार जिलों के लिए अपने रोड शो की शुरुआत बहादुरगढ़ से की। लेकिन केजरीवाल दिल्ली से काफी विलंब से बहादुरगढ़ पहुंचे। इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं की तैयारियां धरी रह गई। शहर में प्रदर्शन करने के बजाय केजरीवाल का काफिला तेजी के साथ रोहतक की ओर निकल गया। काफिले में वाहन ज्यादा और कार्यकर्ता कम थे।
अरविंद केजरीवाल को भिवानी जिले के सिवानी मंडी तक अपना रोड शो आरंभ करने के लिए शनिवार सुबह 10 बजे बहादुरगढ़ में बाईपास मोड़ पर पहुंचना था। करीब 45 मिनट तक सांखोल तक रोड शो करने के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत करने का कार्यक्रम निर्धारित था। इसके लिए पार्टी के रोहतक स्थित कार्यालय ने बहादुरगढ़ के मीडिया कर्मियों को आमंत्रित भी किया था। लेकिन केजरीवाल दोपहर 1:15 बजे सेक्टर-9 के निकट बाईपास मोड़ पहुंचे और दस-पंद्रह सेकंड के लिए अपनी इनोवा गाड़ी से उतरे। इसके बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद को गाड़ी में बैठाकर रोहतक के लिए निकल गए। केजरीवाल का काफिला शहर में से तेजी के साथ निकल गया। केजरीवाल के इस रवैये से करीब सवा तीन घंटे तक इंतजार कर रहे कार्यकर्ता निराशा दिखाई दिए।
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वाहन रहे ज्यादा, कार्यकर्ता कम
स्थानीय कार्यकर्ता शहर में अपनी पार्टी के प्रचार के लिए केजरीवाल का शो नगरवासियों को दिखाना चाहते थे। लेकिन कार्यकर्ताओं की तैयारी धरी रह गई। बहादुरगढ़ में केजरीवाल का स्वागत करने वालों में अश्विनी देशवाल, विनोद प्रधान, डॉ. पंकज व विजय शर्मा भी शामिल थे। काफिले में वाहनों की संख्या तो काफी थी, लेकिन कार्यकर्ताओं की संख्या कम रही। इन कार्यकर्ताओं में भी बहादुरगढ़-झज्जर के बजाय रोहतक व दूसरे जिलों के कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा थी।
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जारी किया बयान
बाद में पार्टी की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद शहीद सैनिकों के परिजनों की एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और आश्रितों को सरकारी नौकरी देगी। उन्होंने कहा कि देश की सेनाओं में प्रत्येक 10वां सैनिक हरियाणवी है। लेकिन हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार ने शहीद सैनिकों की शहादत की कद्र नहीं की है। दिल्ली सरकार ही एकमात्र ऐसी सरकार है, जिसने शहीद सैनिकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।
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