डीसी के आदेशों के बावजूद नहीं खुल पाया रैन बसेरा
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री से भी नीचे जा चुका है। प्रशासन की तरफ से मुसाफिरों या बेसहारा लोगों के रात गुजारने का प्रबंध नहीं किया गया है। इस समय लोग कड़कड़ाती ठंड में सर्द हवाओं के बीच रेलवे स्टेशन परिसर पर ही रात गुजारने को विवश हैं। अमर उजाला के 16 नवंबर के संस्करण में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। डीसी विजय कुमार सिद्प्पा भी करीब सवा माह पहले नगर परिषद अधिकारियों को जगह तलाशने के साथ-साथ लोगों के यहां रात गुजारने के लिए प्रबंध करने के निर्देश दे चुके हैं। धरातल पर अब तक कुछ प्रबंध नजर नहीं आए हैं। जिला बनने के बाद दूसरे ठंड के मौसम में भी रैन बसेरा न होने के कारण मुसाफिरों और बेघर लोगों परेशानी उठानी पड़ रही है। मुसाफिरों को रेलवे स्टेशन व बस स्टेंड परिसर पर ही जागकर रात गुजारनी पड़ रही है। ठंड की शुरूआत के डेढ़ माह बाद भी जिला प्रशासन अभी तक रैन बसेरा खोलने के लिए जगह का चयन करने में भी कामयाब नहीं हो पाया है। वहीं, सामाजिक संगठनों व शहरवासियों ने भी जिला प्रशासन से रैन बसेरा शुरू करने की मांग की है। ठंड के मौसम में रात के समय मुसाफिरों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय ट्रेन की देरी में आवागमन व ट्रेन छूटने के कारण यात्रियों के रात गुजारनी आफत बन जाती है। वहीं, बस सवारियों को भी रात के समय बस न मिलने के कारण बस स्टैंड पर ही बैठकर रात गुजारनी पड़ती है। कंबल व गद्दे न मिलने के कारण मुसाफिरों को फर्श पर लेट कर काम चलाना पड़ता है। प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण बेघरों को तो अपने स्तर पर ही रात को छुपने की जगह तलाशनी पड़ती है। प्रशासन की अनदेखी के चलते सामाजिक संगठनों में गहरा रोष बना हुआ है। सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से जल्द से जल्द रैन बसेरा शुरू करने की मंाग की है।
कोर्ट व सरकार के बाद डीसी आदेश बेअसर
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर प्रदेश सरकार सभी जिला प्रशासन को रैन बसेरों का प्रबंध करने के निर्देश दे चुकी हैं। इनकी पालना करते हुए नवंबर माह की शुरूआत में डीसी विजय कुमार सिद्दपा ने नगर परिषद को रैन बसेरे के लिए जगह तलाशने के आदेश दिए थे। नगर परिषद अधिकारियों को दो-तीन जगह फाइनल करने के आदेश मिले लेकिन एक माह बाद भी नगर परिषद अधिकारियों ने फाइनल जगह का चयन नहीं किया है। नगर परिषद अधिकारियों की सुस्ती मुसाफिरों पर भारी पड़ रही है।
पुराने सामान के कारण बंद किया रैन बसेरा
रेडक्रास सदस्या रिंपी फौगाट ने बताया कि शहर में काफी समय पहले रैन बसेरा खोला गया था। रेडक्रास ने रैन बसेरे में 10 कंबल, 10 रजाई व 10 चारपाई दी थी। एक साल बाद रख-रखाव के कारण सारी चीजें पुरानी हो गई थी। इस कारण रैन बसेरे को बंद कर दिया था। रिंपी फौगाट ने बताया कि पिछले साल भी रैन बसेरा खोलने की मांग के लिए ज्ञापन सौंपा था। अमर उजाला ने गत 16 नवंबर के संस्करण में बसेरा नहीं आखिर मुसाफिर कहां गुजारें रैन नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
वर्जन::
नगर परिषद को इस संबंध में मैंने निर्देश दे रखे हैं। कुछ जगहों का चयन नप अधिकारियों ने किया है। जल्द से जल्द रैन बसेरा शहर में खोल दिया जाएगा। - विजय कुमार सिद्प्पा, डीसी
वर्जन::
जगह हमने फाइनल कर ली है और डीसी साहब को इसके लिए हमने पत्र लिख दिया है। जल्द से जल्द रैन बसेरे की व्यवस्था हम कर देंगे। - हरिकिशन शर्मा, एमई, नगर परिषद