झज्जर। प्रदेश में कभी ईंट भट्ठा किंग के नाम से प्रसिद्ध झज्जर जिले में ईंट भट्ठा उद्योग दम तोड़ता जा रहा है। पिछले दो साल में 107 भट्ठा मालिक अपने ईंट भट्ठे बंद कर चुके हैं। करीब दो साल पहले वायु प्रदूषण
को कम करने के लिए एनजीटी ने एनसीआर क्षेत्र में बिना जिग-जैग सिस्टम वाले ईंट भट्ठों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इन आदेशों के बाद अनेक भट्ठा मालिक अपने भट्ठों को हाईड्रा सिस्टम में तब्दील नहीं कर पाए और उन्होंने अपने लाइसेंस तक का नवीनीकरण नहीं करवाया। इस कारण अब तक 107 ईंट भट्ठों के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं। सात ईंट भट्ठों के लाइसेंस तो पिछले सप्ताह ही डीसी ने रद्द किए हैं। दो साल पहले जिले में 467 ईंट भट्ठे थे और अब 360 ही बचे हुए हैं।
बड़ी मात्रा में दिल्ली व गुरुग्राम सप्लाई होती हैं ईंटें
झज्जर जिला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व गुरुग्राम के नजदीक है। दिल्ली व गुरुग्राम के नजदीक लगने वाले झज्जर क्षेत्र से बड़ी मात्रा में ईंट यहां होने वाले निर्माणों के लिए सप्लाई की जाती है। हालांकि जिला में बिना हाईड्रा सिस्टम के कोई भी भट्ठा नहीं चल रहा है। पिछले साल बिना हाईड्रा सिस्टम के प्रतिबंध के बावजूद भट्ठे चलाने की वजह से 10 भट्ठा मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
करीब तीन माह के लिए मिली थी अनुमति
पिछले साल सरकार की ओर से ईंट भट्ठा मालिकों को कुछ समय के लिए बिना हाईड्रा सिस्टम के ही ईंट भट्ठा चलाने के लिए शपथ पत्र लेकर अनुमति दे दी थी। ईंट भट्ठा मालिकों ने आने वाले सीजन में हाईड्रा सिस्टम लागू करने के लिए शपथ देने वाले भट्ठा संचालकों को अनुमति प्रदान की गई थी। जिससे सामान्य भट्ठे भी चले थे। अब मात्र 360 ईंट भट्ठे ही रह गए हैं और इनमें से भी करीब 80 फीसद से अधिक ईंट भट्ठे ही हाईड्रा सिस्टम से चल रहे हैं और बाकी भट्ठों को भी जिग-जैग सिस्टम से तैयार किया जा रहा है। ईंट भट्ठों को जिग-जैग सिस्टम से तैयार करने में कई लाख रुपये खर्च आता है। जबकि इस सिस्टम से कोयले से ईंट पकानी पड़ती हैं।
एनजीटी के आदेशों के बाद करीब 100 भट्ठे बंद हो चुके हैं। सरकार के आदेश पर कोई भी बिना हाईड्रा सिस्टम लागू किए भट्ठा नहीं चलने दिया जाएगा।
अशोक शर्मा, डीएफएससी, झज्जर।