बहादुरगढ़। रेलवे रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कल्चर्ल फेस्ट शुक्रवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये अपनी प्रतिभा दिखाई। किसी ने हरियाणवी रागिनी सुनाकर शहीदों की याद दिलाई तो किसी ने दामण-कुर्ती मेें नृत्य कर हरियाणवी संस्कृति की छटा बिखेरी।
दरअसल, शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दो दिवसीय खंड स्तरीय कल्चर्ल फेस्ट का आयोजन किया गया। पहले दिन क्विज कांटेस्ट हुआ तो दूसरे दिन शुक्रवार को सांस्कृतिक गतिविधियां हुईं। दो वर्गों में कार्यक्रम हुए। पहले वर्ग में पांचवीं से आठवीं तो दूसरे में नौंवी से 12वीं के विद्यार्थी शामिल थे। विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। एक छात्र ने अपनी हरियाणवी रागिनी के जरिये भगत सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला तो दुल्हेड़ा की छात्राओं ने कुर्ती-दामण में नृत्य कर हरियाणवी संस्कृति झलकाई। पहले वर्ग (कक्षा पांचवीं से आठवीं) के ग्रुप सांग में जीजी एसएसएस छारा ने पहला और दूसरा व जीएसएस सांखोल ने तीसरा स्थान हासिल किया। ग्रुुप डांस में जीजीएसएसएस दुल्हेड़ा की टीम ने बाजी मारी। रागिनी में जीएसएसएस सांखोल विजेता बना। सोलो डांस में जीजीएसएसएस बहादुरगढ़ प्रथम, जीएसएसएस सांखोल द्वितीय और जीजीएसएसएस सांखोल तृतीय रहा। स्किट में जीएचएस सिलोठी, जीएसएसएस बहादुरगढ़ और जीएसएसएस सांखोल क्रमश: पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। सांझी में जीएचएस बालोर विजयी हुआ।
कक्षा नौंवी से 12वीं वाले वर्ग के ग्रुप डांस में जीजीएसएस दुल्हेड़ा ने बाजी मारी। जीजीएसएसएस बहादुरगढ़ की टीम दूसरे पायदान पर रही। ग्रुप सांग में जीजीएसएसएस बहादुरगढ़ ने पहला, जीएसएसएस कानोंदा ने दूसरा और जीएसएसएस सांखोल ने तीसरा स्थान हासिल किया। रागिनी में जीएसएसएस दुल्हेड़ा प्रथम, जीएसएसएस सांखोल द्वितीय और जीजीएसएसएस छारा तृतीय रहा। सोलो डांस में जीजीएसएसएस बहादुरगढ़ पहले दो पायदानों पर कब्जा जमाया, तीसरे पायदान पर जीएसएसएस सांखोल रहा। सांझी में जीजीएसएसएस बहादुरगढ़ प्रथम, जीजीएसएसएस भापड़ौदा द्वितीय और जीएसएसएस बालोर तृतीय रहा। कार्यवाहक खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कोहली ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम के संयोजक की भूमिका कविता सहरावत और अमित दलाल की रही। मंच संचालन भारती व डॉॅ. गीता ने किया तो विजय लक्ष्मी मीडिया प्रभारी रही। प्राचार्य रमेश चंद्र, हरीश डागर और जितेंद्र ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ साथ अन्य प्रेरक गतिविधियों में भाग लेने को प्रेरित किया।