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पहले दरिन नहीं हुई बाजरा खरीद, डाटावेरिफाई करने में ही बीता दिन

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चरखी दादरी। बाजरा खरीद सोमवार से शुरू तो हो गई लेकिन पहला दिन कागजी प्रक्रिया संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में ही बीता। शाम पांच बजे तक किसानों की बिजाई के डाटा को वेरिफाई करने में भी मार्केट कमेटी के अधिकारी और कर्मचारी जुटे रहे। पहले दिन करीब 30 किसानों के बिजाई का डाटा ही वेरिफाई हो पाया।
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जिले में बाजरा की सरकारी खरीद सोमवार से शुरू कर दी गई है। जिले में इस बार बाजरा का बिजाई का कुल रकबा 37 हजार 600 हेक्टेयर में रहा है। पिछले दिनों सरकार ने बिजित बाजरे का डाटा किसानों के जरिए ऑनलाइन मांगा था ताकि यह पता चल सके किस जिले में कितने क्षेत्र में बाजरा की बिजाई की गई थी और औसतन कितने बाजरे की पैदावार होने की संभावना है। यह पूरा आंकड़ा कृषि विभाग कार्यालय से भी जुटाया जा चुका है ताकि खरीद में बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाए और दूसरे राज्यों का बाजरा भी मंडी में नहीं बिक सके और क्षेत्र के किसानों को सीधे तौर पर फायदा पहुंच सके। विभाग विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक गांवों में जाकर कुछ दलाल सीधे किसानों से बाजरे की खरीद करते रहे हैं। मुनाफा कमाने के लिए उसे मंडी में सरकारी रेट पर बेचते रहे हैं अब यह दलालों का धंधा भी नहीं चल सकेगा। इसे लेकर किसानों को पूरा दिन मंडी में बिताना पड़ा। किसानों को भी काफी भागदौड़ करनी पड़ी। मंडी सुपरवाइजर जितेंद्र सिंह ने बताया कि देर शाम तक इन किसानों के बाजरे की खरीद की जा सकेगी। इस बार बाजरे का सरकारी रेट 1950 रुपये प्रति क्विंटल है। हरियाणा वेयरहाउस कारपोरेशन और हैफेड एजेंसी की तरफ से यह खरीद पूरा किया जाना है। इन एजेंसी की तरफ से फिलहाल खरीद 1500 रुपये प्रति क्विंटल की जाएगी लेकिन बाद में सरकार की तरफ से किसान के बैंक खाते में 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद का भुगतान किया जाना है।

डाटा वेरिफाई होने पर जारी होंगे गेट पास
दिनभर में केवल 30 किसानों के ऑनलाइन डाटा को ही वेरिफाई किया जा सका। जिन किसानों ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा रखा है और बिजाई का पूरा विवरण दे रखा है। उनके रिकार्ड को राजस्व विभाग कर्मचारियों की तरफ से वेरिफाई किया गया। जिस भी किसान का डाटा वेरिफाई हो जाता है उस किसान को मोबाइल के जरिए डाटा वेरिफाई होने का मैसेज भेजा जाता है। जिस किसान के पास वेरिफाई का मैसेज जाता है उसे ही मंडी गेट पास जारी किया जाता है।
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किसी किसान का जिला पानीपत दर्शाया तो किसी को नहीं मिला मोबाइल पर मैसेज
- मेरे विवरण में जिला पानीपत दर्शा रखा था लेकिन काफी मशक्कत के बाद मुझे गेट पास जारी हुआ। खरीद प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं बनानी चाहिए।
सुरेंद्र, पालड़ी निवासी

- किसानों को मोबाइल मैसेज न मिलने से भी परेशानी आ रही है। खरीद प्रक्रिया काफी जटिल होने की वजह से अनपढ़ किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। - श्रीभगवान, पालड़ी निवासी

- कई किसानों के ऑनलाइन तैयार की गई सूची से ही नाम गायब है और उन्हें चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई किसानों को जमीन का रकबा मैच नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। - भूप सिंह, झोझू खुदर्

ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया से किसानों को ज्यादा परेशानी बन रही है। मोबाइल पर मैसेज न मिलने से भी किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। खरीद प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। - सुनील कुमार, झोझू निवासी

::: खरीद कार्य के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। ऑनलाइन पंजीकृत किसानों का ही बाजरा खरीदा जा रहा है। डाटा को वेरिफाइ करके ही गेट पास जारी होता है। किसान बाजरे की फसल को सूखाकर मंडी में लाए। - विकास यादव, जिला खरीद अधिकारी
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