अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। कई दिनों से बादल छाने के बाद वीरवार को मौसम ने करवट ली। दोपहर बाद छाए घने बाद अचानक बरसने लगे। शहर में हल्की बूंदाबांदी हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों के एक दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई। बुधवार की अपेक्षा वीरवार को जिले का न्यूनतम तापमान छह डिग्री लुढ़क गया। ओलावृष्टि से रबी की फसल सरसों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। किसान नेताओं की मानें तो इन गांवों में करीब 1500 से 2000 एकड़ में खड़ी फसल को 10 से 45 फीसदी तक नुकसान होने की संभावना है। वहीं, चिकित्सकों ने बदलते मौसम में लोगों से सावधानियां बरतने की अपील की है। खासकर बुजुर्गों को सुबह की सैर से परहेज रखने को कहा है। दिनभर सूर्य देव ने दर्शन नहीं दिए और दिनभर शीत लहर का प्रकोप बना रहा।
जिले के विभिन्न भागों में वीरवार को हल्की से भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से रबी की फसलों में काफी नुकसान होने की आशंका है। सरसों की फसल में ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है। जिले में इस बार गेहूं का सबसे ज्यादा रकबा 54 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र है। ओलावृष्टि में सरसों, सब्जी की फसलों में नुकसान ज्यादा मात्रा में नुकसान हुआ है। वीरवार को अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री पहुंच गया। जिले में इस बार किसानों ने गेहूं और सरसों की समय पर ही बिजाई कर दी थी। 24-25 सितंबर 2018 को हुई मानसून की पछेती बारिश की वजह से किसानों ने बिजाई का काम आसानी से पूरा कर लिया था। अब रबी की फसल 70 से 75 दिन की हो चुकी है। गेहूं में दो से तीन सिंचाई हो चुकी हैं। जनवरी अंतिम सप्ताह में हुई 11 एमएम बारिश से सरसो व गेहूं की फसलों में सिंचाई के रूप में विशेष फायदा पहुंचा। पिछले दिनों से फसलों की बढ़ोतरी व विकास ठीक प्रकार से बना रहा है।
रबी सीजन में प्रमुख फसलों की बिजाई की स्थिति
गेहूं - 54100 हेक्टेयर
सरसो- 53900 हेक्टेयर
चना - 1720 हेक्टेयर
जौ - 3800 हेक्टेयर
इन गांवों में हुई ओलावृष्टि
वीरवार को जिले के कई विभिन्न गांवों में ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से एक दर्जन से ज्यादा गांवों में रबी की फसलों में नुकसान होने का अनुमान है। गांव सरूपगढ़, सातौर, मोरवाला, कंहेटी, भागवी, बिगोवा, मोरवाला, इमलोटा, चरखी,अचीना, झिंझर, लोहरवाड़ा, फतेेहगढ़ सहित कई भागों में करीब 20 से 25 मिनट तक ओलावृष्टि हुई।
अगेती सरसों को ज्यादा नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों की अगेती फसलों में ओलावृष्टि से ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है। सरसों में इस समय फूल लगे हैं। ओलावृष्टि से फूल गिर जाते हैं। एक बार जो फूल गिर जाता है तो दूसरी बार नहीं खिलता। ऐसे में पौधे को फल नहीं लग पाता। इसी प्रकार गेहूं की फसल में भी नुकसान होने का अनुमान है। गेहूं के पौधे के पत्ते एवं तना झड़ने पर इसका विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है।
एक सप्ताह के तापमान एक नजर
1 फरवरी- 20-07
2 फरवरी- 19-07
3 फरवरी- 21-07
4 फरवरी- 22-10
5 फरवरी- 24-13
6 फरवरी- 24- 14
7 फरवरी- 20- 08
धूप निकलने के बाद ही सैर पर निकलें : सीएमओ
बदलते मौसम में वायरल का खतरा बना रहता है। इस मौसम में खांसी-जुकाम बुखार की अधिक संभावना बनी रहती है। ठंड कम होने की सोचकर गर्म कपड़े पहनने से गुरेज न करें। खासकर बुजुर्ग, बीपी, हृदय व श्वास रोगी सुबह की सैर से अगले 10 से 15 दिन के लिए परहेज करें। ये लोग धूप निकलने पर ही सैर के लिए निकलें। - डॉ. विरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी
जिले के काफी गांवों में ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों की गिरदावरी होनी चाहिए ताकि नुकसान का आकलन हो सके। मुआवजा के रूप में 20 हजार रुपये प्रति एकड़ देना चाहिए। - सुनील पहलवान, प्रदेश अध्यक्ष, किसान जनहित समिति
अगर ओलावृष्टि पांच से सात मिनट से ज्यादा समय होती है। ओले का साइज चने के दाने जितना होता है तो इससे फसल में कोई खास नुकसान नहीं हो पाता। ओलावृष्टि से इस समय सरसों की फसलों में ज्यादा नुकसान होने की संभावना बनती है। - डॉ. रमेश रोहिल्ला, कृषि विकास अधिकारी