अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। रोडवेज कर्मियों के हड़ताल पर होने के चलते चरखी दादरी डिपो में पुलिस जवानों और दमकल कर्मचारियों से बसें चलवाने के साथ-साथ विभाग बेरोजगार चालक और परिचालकों के आवेदन फार्म जमा कर रहा है। सोमवार दोपहर करीब सवा दो बजे शराब के नशे में धुत होकर एक बुजुर्ग चालक का आवेदन करने पहुंच गया। इस दौरान बुजुर्ग ने अधिकारियों से बूथ पर खड़ी गुरुग्राम की बस चलाने के लिए मांगी और मना करने पर जमकर हंगामा किया। हेल्प डेस्क पर पहुंचे बुजुर्ग ने हरियाणवीं लहजे में रोडवेज अधिकारियों से कहा कि- होमगार्ड की तरैया एक बसे मन्नै भी दयो, मन्नै चलाणी आवै सै। चिड़िया निवासी उक्त बुजुर्ग ने खुद को आर्मी से रिटायर्ड हवलदार बताया। पुलिस कर्मियों के समझाने पर भी जब वह नहीं माना तो उसे चौकी ले जाया गया। यहां कुछ देर बैठाने के बाद उसे छोड़ दिया गया।
चौकी से बाहर आकर बुजुर्ग ने बताया कि वह चालक के लिए आवेदन करने आया था लेकिन यहां चहेतों के फार्म ही जमा किए जा रहे हैं। उसने बताया कि बूथ पर गुरुग्राम की बस लगी थी लेकिन उसे चलाने वाला कोई नहीं था। इसलिए उसने जीएम से यह बस उसे चलाने के लिए देने की बात कही थी। वहां उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया और इसके बाद वह मेन गेट के समीप पुलिस कर्मियों के पास पहुंचा। वहां उससे मारपीट की गई और इसके बाद चौकी में ले जाकर उसे दोबारा थप्पड़ जड़े गए। इसके बाद उसे रिहा कर दिया गया।
दूसरी ओर सोमवार को स्कूली बसें बस स्टैंड पर नहीं पहुंचने से व्यवस्थाएं गड़बड़ा गईं और यात्रियों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ीं। सुबह करीब सवा चार बजे बस स्टैंड से पहले बस रवाना हुई। रोडवेज के पास जितने पुलिस व दमकल के जवान पहुंचे उन सभी से बसें चलवाई गईं। सोमवार को डिपो से करीब 73 रोडवेज बसें चलीं और इन्होंने करीब 130 फेरे लगाए। डिपो के बेडे़ में शामिल बसों में से महज करीब 55 फीसदी ही चलने से यात्रियों की काफी परेशानियां हुई। बता दें कि चरखी दादरी डिपो में 148 बसें हैं लेकिन इनमें से प्रतिदिन 130 ही चलाई जाती हैं। वहीं, विभाग के करीब 98 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं और तीन दिन विभाग ने 45 स्कूली बसों को विभिन्न लॉकल रूटों पर दौड़ाकर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया था। रविवार को शहर में आयोजित प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने स्कूली बसें रोडवेज को देने से इनकार कर दिया था और सोमवार को एक भी स्कूली बस बस स्टैंड पर नहीं पहुंची। डिपो परिसर से प्रतिदिन करीब 48 हजार यात्री सफर करते हैं और सोमवार को महज 73 बसें इनके लिए नाकाफी साबित हुई।
छह लंबे रूटों पर सातवें दिन भी नहीं चली बसें
चालक-परिचालकों के हड़ताल में शामिल होने के चलते वैकल्पिक व्यवस्था कर रोडवेज अधिकारी लोकल रूटों पर तो बसें चला रहे हैं लेकिन लंबे रूटों की बस सेवाएं पिछले सात दिनों से ही बाधित हैं। सोमवार को भी दादरी डिपो परिसर से अजमेर, झुंझुनू, जयपुर, दिल्ली, पिलानी और चंडीगढ़ के लिए बस सेवा यात्रियों को नहीं मिल पाई। इन रूटों पर बसें नहीं चलने से रोडवेज का राजस्व काफी प्रभावित हो रहा है।
बसें चलाने के लिए ये हैं व्यवस्थाएं
सोमवार को भी रोडवेज विभाग ने दमकल विभाग के 14 व पुलिस विभाग से पांच चालक हायर किए। इसके अलावा रोडवेज अधिकारियों के पास 80 होमगार्ड पहुंचे जिनमें से 11 से बसें चलवाई गईं जबकि बाकियों को परिचालक का काम सौंपा गया। इसके अलावा रोडवेज के 34 क्लर्कों को भी परिचालक का काम सौंपा गया। इसके अलावा बसें चलाने के लिए करीब 25 चालक आरटीए की तरफ से भी रोडवेज को दिए गए हैं।
कोई अस्पताल तो कोई नहीं पहुंच पाया ड्यूटी पर
- मैं गुरुग्राम की एक कंपनी में ट्रांसपोर्ट मैनेजर हूं और ड्यूटी पर जाने के लिए सुबह चार बजे रामपुरा गांव से चला था। साढ़े चार बजे से बस स्टैंड पर खड़ा हूं लेकिन नौ बज तक भी गुरुग्राम की बसे नहीं मिली है। अब बार-बार बसें बदलकर ड्यूटी पर पहुंचना पड़ेगा।
-जयभगवान शर्मा, रामपुरा निवासी
-मेरी मम्मी अस्पताल में भर्ती है और उनकी तबीयत ज्यादा खराब है। मेरा अस्पताल पहुंचना जरूरी है और मैं पांच बजे मैहड़ा गांव से दिल्ली जाने के लिए चली थी। पिछले तीन घंटों से बस का इंतजार कर रही हूं लेकिन दिल्ली की तरफ एक भी बस रवाना नहीं हुई।
-कमला देवी, मैहड़ा निवासी
फोटो 01
शराब के हंगामा करने पर थप्पड़ मारने के लिए तैयार पुलिस कर्मृी।
फोटो 02
शराबी बुजुर्ग को बस स्टैंड से बाहर खदेड़ता पुलिस कर्मी।
फोटो 03
बस स्टैंड के बाहर भी गाली-गलौज करने पर शराबी को चौकी ले जाते पुलिस कर्मी।
फोटो 04
जयभगवान शर्मा।
फोटो 05
कमला देवी।
फोटो 06
प्राइवेट बस की छत पर सवार होते लोग।