झज्जर। सरकार और रोडवेज यूनियनों के प्रतिनिधि मंडल के बीच चंडीगढ़ में हुई वार्ता पर दिन भी कर्मचारियों की ही नहीं बल्कि आम जन की भी नजरें टिकी रहीं। लेकिन दो दौरा की वार्ता के तो विफल हो चुकी थी और तीसरे दौर की वार्ता के लिए विचार विमर्श चल रहा था। वहीं रविवार को भी हड़ताल के कारण बसों के पहिए थमे रहे। झज्जर डिपो में 112 बसों में से मात्र सात बसें ही लोकल रूटों पर चली हैं। जबकि करीब 500 रोडवेज कर्मी हड़ताल पर चल रहे हैं। वहीं अन्य कर्मचारी संगठन भी रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में आ रहे हैं। सरकार की तरफ से कर्मचारियों के खिलाफ मामले दर्ज कराने, एस्मा लगा कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बाद भी कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और अपनी मांगे न माने जाने तक हड़ताल जारी रखने की बात कही जा रही है। अगर सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता भी विफल रही तो हड़ताल अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकती है। हड़ताल की वजह से जहां यात्री पूरी तरह से परेशान हैं वहीं रोडवेज का घाटा भी बढ़ता जा रहा है। अब तक करीब 75 लाख रुपये का घाटा रोडवेज को अकेले झज्जर जिला में हो चुका है।
प्राइवेट बसों पर ही निर्भर है यातायात व्यवस्था
शनिवार की सुबह के बाद परिवहन व्यवस्था केवल प्राइवेट बसों के सहारे ही चल रही है। सामान्य बस स्टैंड पर केवल प्राइवेट बसें ही बूथों पर लगी दिखाई दे रही हैं। झज्जर जिला में 139 बसें परिवहन समिति की हैं। रविवार को अवकाश होने के कार।ण यात्रियों की संख्या कम रही, लेकिन सोमवार को परेयानी और अधकि बढने की संभावना है। क्योंकि तीन दिन के अवकाश के बाद सभी सरकारी और प्राईवेट कार्यालय खुलेंगे। वहीं शिक्षण संस्थानों के अवकाश भी समाप्त हो जाएंगे और विद्यार्थी भी अपने शिक्षण संस्थानों में पहुंचेंगे। लेकिन हड़ताल जारी रहा तो
उन्हें काफी मुसिबतों का सामना करना पड़ेगा।
-तीन दिन में आए 847 आवेदन
रोडवेज की हड़ताल के कारण सरकार ने चालक और परिचालकों की भर्ती निकाली हुई है। जिसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्तूबर निर्धारित की हुई है। तीन दिन में अब तक 847 चालक और परिचालक की भर्ती के लिए आवेदन आ चुके हैं। तीसरे दिन 347 उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। इनमें 145 ड्राइवर और 202 कंडक्टर के उम्मीदवार शामिल हैं।
आज से हड़ताल पर जाएंगे दूसरे विभाग
हरियाणा कर्मचारी महासंघ से जुड़े पदाधिकारियों की बैठक रविवार को हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि अगर रविवार को चंडीगढ़ में तालमेल कमेटी के साथ अधिकारियों की वार्ता सिरे नहीं चढ़ती है तो सोमवार 22 अक्तूबर से कर्मचारी महासंघ से जुड़ी सभी यूनियन हड़ताल पर चली जाएगी। इसमें सबसे अधिक प्रभाव बिजली निगम की एचएसईबी यूनियन का दिखेगा।