चरखी दादरी। एनएच-152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे मामले में किसानों ने 27 जून को प्रदेश में 29 जगह रेल रोकने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि रेल रोकने के बाद आंदोलन की अगली कड़ी में गुरुग्राम और दिल्ली का पानी रोका जाएगा। मामले में राजस्व विभाग ने चरखी दादरी डीआरओ को अवार्ड राशि में संशोधन के लिए शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। रिपोर्ट को तैयार करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर सीटीएम वीरेंद्र सिंह को चेयरमैन बनाया गया है। उधर किसानों का कहना है कि अब प्रशासन के झांसे में फंसने वाले नहीं हैं। प्रशासन ने भी किसानों के तेवर देखकर धारा-144 लागू कर दी है। लॉ एंड आर्डर को कायम रखने के लिए सोनीपत, झज्जर, रोहतक और भिवानी सहित चार जिलों से पुलिस फोर्स चरखी दादरी पहुंच चुकी है। इसके अलावा जीआरपी और आरपीएफ भी तैनात रहेगी। डीसी मुकेश आहूजा का कहना है कि जिले में धारा-144 लागू कर दी गई है। जिले में लॉ एंड आर्डर भंग नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे लोगों से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
एनएच-152 डी के लिए जिले के 17 गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। किसानों का कहना है कि पुराने रेट के अनुसार किसानों को मुआवजा मान्य नहीं है। सरकार को नए रेट के अनुसार अवार्ड घोषित करना चाहिए। इसके लिए किसान 26 फरवरी से आंदोलनरत हैं। 27 जून को रेल रोको आंदोलन के मद्देनजर प्रशासन तैयार है। जानकारी के अनुसार चरखी दादरी आने और जाने वाली ट्रेनों में करीब 50-50 सुरक्षा कर्मियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भेजा जाएगा। जींद और चरखी दादरी में किसानों के धरनों की अगुवाई करने वाले किसान नेता एवं अधिवक्ता रमेश दलाल का कहना है कि चरखी दादरी के उपायुक्त मुकेश आहूजा को पूरे मामले से पहले ही अवगत करवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ 12 जून को हुई बैठक को 14 दिन बीत चुके हैं लेकिन कार्रवाई संतोषजनक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों के रेल रोको आंदोलन को देखकर जिला प्रशासन कागजी प्रक्रिया में किसानों को उलझाकर रखना चाहता है, लेकिन किसान 27 के रेल रोको आंदोलन पर अडिग हैं। रमेश दलाल का कहना है कि अगर तत्काल संशोधित मार्केट रेट की सूची उनके पास नहीं पहुंची तो वीरवार को प्रदेश में तय कार्यक्रम के अनुसार सभी जगहों पर रेल रोकी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर किसानों को ट्रैक से उठाने का प्रयास किया गया या फिर सख्ती की गई तो देश में 54 प्वाइंटों पर रेल रोक दी जाएगी। इसके लिए किसान विभिन्न राज्यों के किसान संगठनों के लगातार संपर्क में है। हालांकि प्रदेश में किन 29 जगहों पर आंदोलन के पहले चरण में रेल रोकी जाएगी इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। सूत्रों की मानें तो पहले किसान धरनास्थल पर एकत्र होंगे और इसके बाद ही रेलवे ट्रैक की तरफ कूच करेंगे।