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एमआईई: हर माह पानी के लिए खर्च हो रहे ढाई लाख रुपये

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बहादुरगढ़। शहर का आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआइई) बहादुरगढ़ में दो हजार औद्योगिक इकाइयों सहित छोटी-मोटी कुल 2500 कंपनियां स्थित हैं। गर्मी के मौसम में यहां पर सप्लाई में आने वाला पानी पीने लायक नहीं होता। उद्यमियों का कहना है कि उन्हें या तो टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर कैंपर का पानी सप्लाई करने वालों पर। शुद्ध पानी न मिलने पर उद्योगपतियों को प्रतिदिन बाहर से हजारों रुपये का पानी खरीदना पड़ता है। गरमी में उद्यमी पानी पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर रहे हैं।
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यहां के उद्योगपति विश्वास कुमार, सुनील गुप्ता, पवन गोयल, नितेश जैन का कहना है कि बहादुरगढ़ का औद्योगिक क्षेत्र (एमआइई) कई दशकों पुराना है। यहां पर छोटी-मोटी मिलाकर 2500 से अधिक कंपनियां हैं। इनमें हजारों कर्मचारी काम करते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की खपत ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई में आने वाला पानी पर्याप्त नहीं होता। इसके चलते उन्हें टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनका खर्च बढ़ जाता है। खास बात यह है कि जो पानी सप्लाई में आता है वह पीने लायक भी नहीं होता। उद्योगपतियो का कहना है कि बढ़ते जल संकट से उद्यमी काफी परेशान हैं। साल दर साल पानी की किल्लत यहां बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। इसे दूर नहीं किया गया तो औद्योगिक माहौल प्रभावित होगा।
1500 के हिसाब से मिलता है टैंकर
उद्योगपतियों का कहना है कि एमआइई में पानी की सप्लाई करने वाले टैंकर मालिक 1500 रुपये में सप्लाई देते हैं। वहीं फिल्टर पानी सप्लाई करने वाले व्यवसायी 15 रुपये प्रति जग के हिसाब से देते हैं। इससे उद्यमियों को पानी पर ही हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कंपनियों में कोई एक-दो जग पानी से काम नहीं चल पाता और काफी जग पानी लेना पड़ता है। इससे उन पर काफी बोझ पड़ रहा है।
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डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारी करते हैं काम
एमआइई में स्थित कंपनियों में डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। अधिकतर कंपनियां 24 घंटे भी चालू रहती हैं। इन कंपनियों में सैकड़ों की सं या में कर्मचारी कार्यरत हैं। गर्मी के मौसम में पानी की खपत वैसे ही ज्यादा रहती है।
कंपनी में कर्मचारियों के हिसाब से लगते हैं कैंपर
बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विकास आनंद सोनी का कहना है कि जो कंपनी जितनी बड़ी है और उसमें अधिक कर्मचारी काम करते हैं तो वहां गर्मी के दिनों में प्रतिदिन 40 से 50 पीने के पानी के कैंपर प्रयोग हो जाते हैं। जो छोटी कंपनियां हैं वहां पर 10 से 15 कैंपर प्रयोग होते हैं। फिलहाल पानी की समस्या गहराई हुई है। कैंपर और अन्य साधनों से पीने का पानी मंगाने पर करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
हुडा के जेई यशवंत का कहना है कि फिलहाल कई स्थानों पर सड़कें और सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। एकाध जगह दिक्कत है तो उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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