बहादुरगढ़। नगर परिषद और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की अनदेखी के कारण शहर की हवा में जहर घुल रहा है। सफाई कर्मचारी धड़ल्ले से कचरे के ढेरों को आग के हवाले कर रहे हैं। इससे हवा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का आंकड़ा भी बढ़ जाता है। दिल्ली-रोहतक रोड स्थित एक खाली प्लॉट में स्थानीय लोग कचरा डालते हैं। इसके बाद सफाई कर्मचारी उठाकर ले जाते। लोगों का कहना है कि पिछले दस दिनों से सफाई कर्मचारी कूड़े में आग लगाकर कम कर देते। इसके बाद अगले दिन कूड़े को उठा ले जाते। ऐसे में धुएं से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। यह स्थिति लगभग हर रोज रहती है। नगर परिषद के सफाई निरीक्षक को कई बार फोन कर सूचित किया है, लेकिन वह मौके पर कभी जांच पड़ताल के लिए नहीं आते। कूड़े के ढेर में प्लास्टिक के जलने से जहरीली गैसें निकलती हैं, जो आंख, त्वचा और फेफड़ों के लिए खतरनाक होती हैं। बावजूद, इस पर अंकुश लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शहर में रोजाना कई टन कचरा निकलता है। इसमें प्लास्टिक कचरे की मात्रा ज्यादा होती है। इसके निस्तारण के लिए नगर परिषद ने जोन भी बनाए हैं। शहर के अलग-अलग स्थानों से कचरा उठाकर डंपिंग जोन तक पहुंचाने की व्यवस्था है। लेकिन, इसका पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। कई स्थानों पर कचरे को उठाने की जगह उसमें आग लगा दी जाती है। इसके अलावा डंपिंग जोन में भी कचरे में आग लगा दी जाती है। जहां अक्सर धुआं निकलता नजर आता है। कचरे में शामिल प्लास्टिक जलने की वजह से कई प्रकार की जहरीली गैस निकलती है। जो हवा में आसानी से घुल जाती हैं। इससे आंख, त्वचा और फेफड़ों के रोग की संभावना बढ़ जाती है।
कचरा जलाना अपराध है। इसमें दस हजार रुपये तक जुर्माने और एफआईआर तक का प्रावधान है। शहर में वायु प्रदूषण को रुकवाना नगर निगम का काम है। जो कर्मचारी कूड़ा जला रहे हैं। उन पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. विजयपाल यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।