अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। देशभक्ति का भाव जागृत करना, वेद का प्रचार करना, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना तथा समाज में भाईचारा व एकता की भावना को बढ़ावा देना वर्तमान समय में वेदों की शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। यह विचार हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को गुरुकुल महाविद्यालय, झज्जर के वार्षिक उत्सव को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य देवव्रत ने महाशिवरात्रि और आर्य समाज के उद्भव पर बोलते हुए कहा कि इसी दिन घटित हुई एक घटना ने बालक मूल शंकर के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया था। जीवन में अनेक छोटी-बड़ी घटनाएं होती है। इन घटनाओं को देखने का भाव ही सामान्य व महापुरुषों के बीच अंतर को स्पष्ट करता है। महापुरुष इन घटनाओं से निष्कर्ष निकालकर आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा देते हैं। धीर-गंभीर योगी महर्षि दयानंद अपने लक्ष्य से नहीं भटके बल्कि उस दौर की सभी बुराईयां जिनमें पहली देश का गुलाम होना दूसरा बहन-बेटियों पर सती प्रथा जैसी कुरीतियों से जुल्म व पढ़ाई-लिखाई से वंचित करना तीसरा समाज में जात-पात की भावना तथा चौथी अंध विश्वास व आडंबरों पर वेदों के आधार पर वैज्ञानिक ढंग से चोट की। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि का दिन हम सबके लिए स्मरण, ज्ञान अर्जन व प्रेरणा का दिन है।
दो लाख रुपये की वित्तीय मदद
इस अवसर पर उन्होंने गुुरुकुल झज्जर को दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की। गुरुकुल महाविद्यालय की ओर से आचार्य देवव्रत को शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया गया। आचार्य देवव्रत ने सत्यवीर प्रेरक द्वारा लिखी गई पुस्तक मेरा ग्राम पाबड़ा समूह का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान झज्जर के उपायुक्त संजय जून, एसडीएम शिखा, आचार्य विजयपाल, पूर्ण सिंह देशवाल, डा. राजकुमार, रामनिवास, डा. सुधीर, रामबीर, राधाकृष्ण, कृष्ण शास्त्री, डॉ. नरेंद्र कटारिया एडवोकेट सहित अन्य मौजूद रहे।