अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
झज्जर रोड स्थित जगन्नाथ विश्वविद्यालय में बदलते जलवायु परिवर्तन के सुधार की रणनीति पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में को-नोबल अवॉर्ड विजेता फ्रांस के प्रो. आर्थर रीडेकर समेत कई बड़े विद्वानों ने जलवायु परिवर्तन में वनों, फसलों और जीव-जंतुओं के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
जगन्नाथ विश्वविद्यालय में हुई कार्यशाला का उद्घाटन वाइस चांसलर प्रो. एचएल वर्मा ने किया। कनाडा के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय से आए प्रो. डेविड आल्सन, कनाडा के एक विश्वविद्यालय से आए प्रो. रविंद्र छिब्बर, जर्मनी के एग्रीकल्चर एक्सीलेंस के अध्यक्ष डॉ. मारप्रेड कर्ण, डॉ. ई. कजवन, मार्डोक विश्वविद्यालय आस्ट्रेलिया से आई हरियाणा मूल की मिस ज्योति राणा, प्रो. हुसैन ई. रुश्दी और जगन्नाथ विश्वविद्यालय के डीन एग्रीकल्चर प्रो. आरके बहल ने वर्कशॉप में आए प्रतिभागियों को संबोधित किया।
तमाम विद्वान वक्ताओं ने आज के परिवेश में जलवायु के कारणों, प्रभावों और समाधानों पर चर्चा की। प्रो. रीडेकर ने बताया कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करके ही ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को कम किया जा सकता है। प्रो. मेनफ्रेड ने भौगोलिक भोज्य संसाधन और जलवायु परिवर्तन पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने उत्पादन, प्रबंधन एवं कृषि संबंधी रणनीतियों का आज की जलवायु परिवर्तन से तालमेल बैठाने पर किसानों को सलाह दी। प्रो. रविंद्र छिब्बर ने अजैविक जीन्स से फसलों की गुणवत्ता को विकसित करने पर बल दिया। ई. कगमन ने गेहूं की विभिन्न प्रगतियों की विपरीत परिस्थितियों में सुधारकर अपने विचार प्रकट किए। मिस ज्योति राणा ने बताया कि बदलते हुए जलवायु परिवेश में फसलीय मिट्टी को ज्यादा उत्पादित कैसे बनाया जा सकता है। कार्यशाला में रोहतक से आई डॉ. अनीता, वैश्य बीएड कॉलेज बहादुरगढ़ की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा व दिव्या बंसल ने भी भाग लिया।