अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
प्रवेश परीक्षा में सफलता के बाद मंगलवार सुबह शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत दाखिले लेने पहुंचे बच्चों को दाखिले देने से इंकार करने पर नगर के एसआर सेंचुरी स्कूल के बाहर हंगामा हो गया। आवेदकों की भीड़ को देख स्कूल प्रबंधन ने गेट बंद कर दिया। दो जमा पांच मुद्दे जनांदोलन के कार्यकर्ताओं ने स्कूल पर ताला लगाने की चेतावनी दे दी। प्रबंधन ने दोपहर बाद प्रवेश प्रक्रिया आरंभ की। बताया गया है कि इस पर भी कई शर्तें लगाई जाएंगी।
इस वर्ष 134-ए के तहत 557 बच्चों ने 55 फीसदी या इससे अधिक अंक पाकर प्रवेश परीक्षा पास की है। इन सभी बच्चों को खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल अलॉट किए हैं। सबसे अधिक 127 बच्चों को एसआर सेंचुरी स्कूल जाने को कहा गया है। 104 बच्चों को विजया स्कूल के लेटर दिए गए हैं। हरदयाल पब्लिक स्कूल, श्रीरामा भारती स्कूल, पीडीएम व दिल्ली पब्लिक स्कूल भी कुछ बच्चों को अलॉट किए गए हैं। शेष स्कूलों में बहुत कम बच्चे भेजे गए हैं।
स्कूल का गेट कर दिया बंद
मंगलवार को जब 100 से अधिक अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए सेंचुुरी स्कूल पहुंचे तो भीड़ देखकर स्कूल स्टाफ ने गेट बंद कर दिया। अभिभावकों ने बताया कि वे दो दिन से स्कूल आ रहे हैं, मगर स्कूल की तरफ से प्रवेश देने से मना किया जा रहा है। दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के जिला प्रधान चीनू को जानकारी मिली तो झज्जर से वह भी अपने दो साथी कार्यकर्ताओं के साथ आ गए और अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन से बातचीत की। प्रधान ताला-चाबी भी साथ ही लाए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि सभी पात्र बच्चों को दाखिला नहीं दिया गया तो स्कूल पर ताला जड़ दिया जाएगा।
कई बहाने बनाए
स्कूल के बाहर इकट्ठे हुए अभिभावकों में किला मोहल्ला की पूनम, लाइनपार की सविता, नीरू, बबलेश, संगीता, शोभा, मीना, अमित, कुसुम, काठमंडी से अशोक, आसौदा से योगेश, शिव बहादुर, संदीप वर्मा व सुरेश कंसल भी शामिल थे। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन कई तरह के बहाने बनाकर उनके बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर रहा है। कहा जा रहा है कि स्कूल में सभी सीटें फुल हो चुकी हैं और बैठने की तक जगह नहीं है। बच्चों को नीचे बैठना पड़ेगा। बच्चों के इंटरव्यू लेने की बात भी कही गई। अंत: प्रधान चीनू से हुई बातचीत के बाद शाम चार बजे के बाद सकारात्मक नजरिये से काम शुरू करने का आश्वासन दिया गया। लेकिन उससे पहले ही प्रवेश प्रक्रिया आरंभ कर दी गई।
संचालकों ने जताई आपत्ति
उधर, किसी भी बच्चे को बाल भारती स्कूल और सेंट थामस पब्लिक स्कूल अलॉट न किए जाने पर उन स्कूल संचालकों ने आपत्ति जताई कि जिनमें काफी बच्चे भेजे गए हैं। चर्चा है कि सेंट थामस का कहना है कि यह स्कूल अल्पसंख्यक समुदाय का होने के कारण 134-ए में नहीं आता। बाल भारती स्कूल प्रबंधन ने भी इस नियम में न आने की बात कही है। लेकिन कोई आधार नहीं दिया है। शिक्षा विभाग इन दोनों स्कूलों के रवैये से नाखुश है। डीईओ सतबीर सिवाच ने इन दोनों स्कूलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिख दिया है। अपने नाम न छपवाने के इच्छुक कई स्कूल संचालकों ने कहा कि अगर सभी स्कूलों में बच्चे भेजे जाते तो शहर के तीन ही स्कूलों पर इतना बोझ नहीं पड़ता।
सरकार करे भुगतान
निजी स्कूल एसोसिएशन ने इस मामले पर विचार विमर्श कर आगे की रणनीति बनाने के लिए बुधवार को झज्जर में जिला स्तरीय मीटिंग बुलाई है। यह मीटिंग झज्जर के सनराइज स्कूल में होगी। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के जिला प्रधान जगबीर चाहार करेंगे। इस बैठक में बातचीत कर सरकार से उन सभी अभिभावकों के आय प्रमाण पत्रों की जांच कराने की मांग की जाएगी जिनको 134-ए के तहत निजी स्कूलों में मुफ्त पढ़ाने के लिए चुना गया है। चाहार ने कहा कि सरकार से हुए समझौते में शहर में 400 रुपये प्रति बच्चा और गांव में 300 रुपये प्रति बच्चा देना तय हुआ था। लेकिन सरकार ने किसी को कुछ नहीं दिया। अब 134 को पढ़ाने के लिए पिछला सारा बकाया देना चाहिए।
सबकुछ नियमानुसार होगा
हमारे स्कूल में समाज के अमीर-गरीब सभी तबकों के बच्चों को पढ़ाया जाता है। 134-ए में भी बच्चों को स्कूल में प्रवेश देने से इंकार नहीं किया। लेकिन अपने बच्चों को लेकर अभिभावक जब आए तो मैं स्कूल में नहीं था। मेरी उपस्थिति के बिना प्रक्रिया नहीं चल सकती थी। इसलिए बच्चों और अभिभावकों को दोपहर बाद बुलाया गया। बच्चों के प्रवेश के लिए आवेदन-पत्र ले लिए गए।
- वीएन झा, प्रधानाचार्य एसआर सेंचुरी स्कूल।
सभी को देना होगा प्रवेश
हमने उन सभी स्कूलों में बच्चे भेज दिए हैं जिन्होंने अपने यहां सीटों का विवरण दिया था। नियम 134-ए की परिधि में आने वाले सभी निजी स्कूलों को प्रवेश देना होगा। कोई स्कूल नियम को उल्लंघन करेगा तो शिक्षा विभाग की ओर से संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
- मदन चोपड़ा, बीईओ, बहादुरगढ़।