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जिदंगियां लील रहे हाईवे के अवैध कट, टोल के बावजूद सुरक्षित नहीं सफर 19-38-26

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
रोहतक की ओर जाने वाले फोरलेन हाईवे पर अगर आप टोल देने के बाद फर्राटा स्पीड से गाड़ी चलाने की सोचते हैं तो यह आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। क्योंकि अमर उजाला टीम ने सोमवार को अपनी पड़ताल में पाया है कि झज्जर से रोहतक के बीच में 12 ऐसे अवैध कट बने हुए हैं, जहां से पता नहीं कब ट्रैक्टर, कार या बाइक आ जाए। इससे आप बेखबर रहते हैं क्योंकि कट अवैध होने के चलते वहां पर आपको सावधान करने वाला कोई संकेतक नहीं मिलता। जिसके चलते इस हाईवे पर आए दिन बाइक सवार हादसों को शिकार होते रहते हैं। खास बात ये है कि इस हाईवे पर वाहन चालकों से टोल वसूली करने के बावजूद भी टोल कंपनी अवैध कटों को बंद करने के लिए 6 माह में एक बार ध्यान देती है।
रेवाड़ी रोड का भी यही हाल
रेवाड़ी रोड पर गांव कुलाना में बना अवैध कट अब तक चार लोगों की जिंदगी लील चुका है। 2013 में अपनी बहन से मिलने आए यूपी निवासी एक युवक की मौत इसी अवैध कट से बाइक क्रॉस करने के दौरान हुई थी। इसके बाद तीन अन्य व्यक्ति भी इसी कट से बाइक निकालते हुए शिकार हो चुके हैं। हालांकि इन कटों के लिए प्रशासन के साथ-साथ आमजन भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।
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इतना चुकाना पड़ता है टोल
वाहन वन साइड अप-डाउन
कार-जीप 40 60
एल सी वी, टाटा 407, मिनी बस 65 100
बस और ट्रक 140 205
हैवी व्हीकल 215 325
ओवर साइज व्हीकल 265 395

41 किलोमीटर के दायरे में 16 वैध कटा
डीघल टोल का एरिया जलेबी चौक रोहतक से दादनुपर तक है। इस दायरे में वैध कट शिमली, करौंथा, डीघल, मदाना, दुजाना, बिरधाना, गुढ़ा, बिरधाना व झज्जर का, सुर्खपुर, सिकंदपुर, सिलानी के दो कट, सिलाना, रायपुर, खखाना, दादनपुर के वैध कट है।

धुंध के सीजन अवैध कट खतरे से कम नहीं
धुंध का सीजन शुरू हो चुका है, ऐसे में इन अवैध कटों को बंद करना जरूरी हो गया है। क्योंकि धुंध के सीजन में दृश्यता कम हो जाती है। ऐसे में अवैध कटों से अचानक निकलने वाले वाहनों को दूर से देख पाना मुश्किल होगा। इसके चलते दुर्घटना होने की आशंका अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में इन अवैध कटों को बंद समय रहते किया जाना चाहिए।
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वर्जन
हाईवे पर अवैध कटो को टोल कंपनी द्वारा हर छह महीने में बंद किया जाता है और बंद करने के कुछ दिन बाद किसान खेतों में जाने के लिए रास्ते को लेकर कटों को तोड़ देते है। जिससे अवैध कट बंद नहीं हो पाते है।
- नीतेश, मैनेजर, टोल कंपनी डीघल।
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