अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। दिव्यांगों के लिए जिले में सरकार की तरफ से पुनर्वास केंद्र की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बेघर दिव्यांगों के पास रहने का कोई विकल्प नहीं है। इसे देखते हुए सर्व दिव्यांग अधिकार एवं कल्याण मंच से जुड़े दिव्यां नागरिकों ने अपने स्तर पर पुनर्वास केंद्र का निर्माण कराने का बीड़ा उठाया था। मंच पदाधिकारियों ने चंदा मांगने की बजाय अपने स्तर पर ही पैसे एकत्रित कर जमीन खरीदी थी और इसके बाद भवन का निर्माण कार्य भी शुरू कराया। यह पुनर्वास केंद्र खोलने का मकसद बेसहारा दिव्यांगों को छत के साथ-साथ स्वावलंबी बनने का प्रशिक्षण मुहैया कराना है। मंच पदाधिकारियों का कहना है कि अब पैसे का अभाव होने से छत निर्माण (लेंटर डालने का काम) रुका हुआ है। यह पुनर्वास केंद्र रावलधी-भिवानी लिंक मार्ग पर आरओबी के पास निर्माणाधीन है।
सर्व दिव्यांग अधिकार एवं कल्याण मंच प्रदेश कोषाध्यक्ष सोमबीर रावलधी ने बताया कि जिले में करीब 22 हजार दिव्यांग नागरिक हैं। इनमें सात हजार महिलाएं हैं जबकि 13700 पुरुष हैं। वहीं, जिले में दिव्यांग बच्चों की तादाद करीब 1300 के पार है। उन्होंने बताया कि जिले में सरकार की तरफ से दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बेघर या परिजनों की प्रताड़ना से तंग दिव्यागों को सहारा नहीं मिल पा रहा। उनकी परेशानियों को देखते हुए सर्व दिव्यांग अधिकार एवं कल्याण मंच पदाधिकारियों ने दिव्यांग पुनर्वास केंद्र शुरू करने का बीड़ा उठाया था। मंच पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी कमाई से रुपये निकालकर ही इसके लिए जमीन खरीदी और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू कराया था।
सोमबीर ने बताया कि यहां दिव्यांग महिला, पुरुष और बच्चों के रहने के लिए अलग से व्यवस्थाएं की जानी है। इसके साथ-साथ स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सोमबीर का कहना है कि पुनर्वास केंद्र की जमीन और निर्माण पर करीब 14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके लिए उन्होंने किसी से चंदा नहीं मांगा बल्कि मंच के पदाधिकारियों ने अपने सहयोग से ही यह काम अब तक कराया है। पिछले कुछ दिनों से लेंटर डालने का काम रुका हुआ है और इसका कारण अब पैसे का अभाव है। उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द इसका निर्माण कार्य पूरा कराया जाए और दिव्यांगों को यहां आत्म निर्भर बनने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया जाए।
दिव्यांग बनाएंगें ब्लैक बोर्ड चॉक, स्कूलों में होगा प्रयोग
मंच कोषाध्यक्ष सोमबीर ने बताया कि उन्होंने अपनी प्लानिंग जिला प्रशासन के सामने रखी थी। जिला उपायुक्त को उन्होंने बताया कि यहां दिव्यांगों को चॉक बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बकौल सोमबीर, जिला उपायुक्त ने उनके द्वारा बनाया गया चॉक की राजकीय स्कूलों से खरीद कराने का आश्वासन भी दिया है ताकि आगे केंद्र चलाने में कोई परेशानी न आए।