अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
तहसील कार्यालय में बुधवार को पटवारी काम पर नहीं पहुंचे, जबकि तहसीलदार ने सुबह ही कामकाज शुरू कर दिया। पूरा दिन पटवार खाने पर ताला लटका रहा। जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण कामकाज के लिए पटवारखाने गए तो बिना काम किए लौटना पड़ा। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी ग्रामीण रोष जाहिर कर रहे हैं।
तहसील कार्यालय में 8 दिन पहले तहसीलदार व वहां के कानूनगो के बीच हाजिरी लगाए जाने और बाद में मामला पुलिस में चले जाने के चलते पटवारी हड़ताल पर चले गए थे, जिसके बाद से तहसील कार्यालय में जमीन संबंधी कामकाज पूरी तरह से बंद है। पटवारियों के हड़ताल पर जाने से लोगों की परेशानी का कोई पैमाना नहीं है। लोग तहसील में जाते तो काम के लिए हैं मगर पटवारियों के न होने से निराश और मायूस हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की परेशानी का कोई पैमाना नहीं है। दिनों दिन परेशानी बढ़ रही है। हालांकि रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने के लिए क्लर्क को नियुक्त कर दिया है मगर इसके अतिरिक्त आय प्रमाण पत्र, जमीन इंतकाल संबंधी कार्य पूरी तरह से बाधित है। आम लोगों में चर्चाएं जोरों पर हैं कि आखिर गलती किसकी है। आमजन को परेशानी का सामना क्यों झेलना पड़ रहा है। क्यों पटवारियों की लेटलतीफी पर संज्ञान लेना अधिकारियों को भारी पड़ रहा है। क्यों सरकार मौन है और क्यों कड़े कदम नहीं उठा रही है। हालांकि सभी पटवारियों की जांच के लिए बादली के एसडीएम त्रिलोकचंद्र ने कार्रवाई शुरू कर दी है जिस पर वीरवार को फैसला हो जाएगा, क्योंकि वह बुधवार को तहसील कार्यालय नहीं पहुंच सके, जबकि बताया जा रहा है कि काम पर न आने वाले सभी पटवारियों की गैर हाजिरी लगा दी गई है।
ऐसे बढ़ रहा है विवाद
27 दिसंबर को तहसीलदार से विवाद के चलते सभी पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर चले गए। 28 दिसंबर को भी कोई पटवारी काम पर नहीं आया। 29 दिसंबर को जिला लघु सचिवालय पर सभी पटवारियों ने प्रदर्शन किया और बादली के एसडीएम ने विवाद को सुलझाते हुए तहसीलदार के छुट्टी पर चले जाने की बात कहकर पटवारियों की हड़ताल समाप्त करवाई। 30 और 31 दिसंबर को तहसील छुट्टी रही। पहली जनवरी को तहसीलदार छुट्टी पर रहे जबकि 2 जनवरी को तहसीलदार के तहसील में पहुंचते ही सभी पटवारी और कानूनगो कामकाज छोड़कर पटवारखाने से चले गए जो कि 3 जनवरी को भी वापस नहीं आए।