अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
1971 के युद्घ में पाक पर हुई जीत को लेकर हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। झज्जर के शहीद स्मारक पर भी प्रशासन की ओर से हर साल कार्यक्रम की औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। कुछ ऐसी औपचारिक रस्म निभाने के लिए शनिवार को झज्जर के शहीद स्मारक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें एडीसी सुशील सारवान मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचे थे। एडीसी ने शहीद स्मारक पर जूतों सहित चढ़कर शहीदों को पुष्षगुच्छ अर्पित किया।
वहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उनके साथ मौजूद दूसरे अधिकारियों ने भी जूते पहन रखे थे। जूतों सहित शहीद स्मारक पर चढ़कर पुष्षगुच्छ अर्पित करने के चलते पूर्व सैनिकों में खासा रोष है। पूर्व सैनिक संगठन इसे शहीदों के अपमान के तौर पर देख रहे हैं। वहीं, पूरे मामले में एडीसी सुशील सारवान का पक्ष जानने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हुआ।
सम्मान के बाद ये दिया संदेश
जूतों सहित शहीद स्मारक पर चढ़कर शहीदों का सम्मान करने के बाद एडीसी सुशील सारवान ने कहा कि देश की रक्षा और अखंडता को बनाए रखने में वीर शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों का अतुलनीय योगदान रहा है। जिन वीर सैनिकों ने मातृभृूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोत्तम बलिदान दिया है देश उनका सदैव ऋणी रहेगा। वीरों की शहादत सदैव युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। उन्होंने कहा कि देश के वीर सैनिक बहुत ही प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करते हुए देश की सीमाओं पर पहरा दे रहे हैं तथा देश के लिए हर प्रकार की कुर्बानियां देने के लिए तत्पर हैं। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि देश के लिए कुर्बानी देना एक बड़ी बात है जिसकी कीमत हम नहीं चुका सकते।
61 वीरों ने दी थी कुर्बानी
1962 भारत-चीन युद्ध और 1965 भारत -पाक युद्ध की भांति 1971 भारत-पाक युद्ध में भी झज्जर जिले के वीर सैनिकों का अहम योगदान रहा। तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की तरफ शुरू किए गए नापाक आक्रमण का भारतीय सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया। भारतीय सेना के जवाबी हमले के सामने पाकिस्तान सेना मात्र 14 दिन में ही घुटनों के बल आ गई। इसी के परिणाम स्वरूप 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए हथियार डाल दिए। इस युद्ध में झज्जर जिले के 61 वीर योद्धाओं ने अपना सर्वोत्तम बलिदान दिया और भारतीय सैन्य इतिहास में अमर हो गए। जिला सैनिक बोर्ड के संग्रहालय में मौजूद रिकार्ड के अनुसार 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान 32 वीर सैनिकों तथा 1965 में भारत-पाक युद्ध में झज्जर जिले के 57 वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोत्तम बलिदान दिया।
ये बोले सैनिक संगठन
- अर्द्धसैनिक बल संगठन के प्रदेशाध्यक्ष कमांडेंट सुरेश फौगाट ने कहा कि यह बड़े हाई लेवल की असभ्य घटना है। किसी अधिकारी के द्वारा शहीद स्मारक पर जूतों सहित जाने की घटना तमाम सैनिकों व शहीदों का अपमान है। अधिकारी औपचारिकता निभाने के लिए नैतिक मूल्यों का निर्वहन नहीं कर रहे। इस घटना से समूचे पूर्व सैनिकों में रोष है। जिसकी वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
- शहीद यादगार स्मारक डीघल के प्रधान कप्तान रणजीत ने कहा कि स्मारक पर जूतों सहित किसी भी अधिकारी को नहीं जाना चाहिए। अगर ऐसा हुआ है तो यह बहुत गलत कृत्य है। इस प्रकार की घटना को शहीदों के अपमान की दृष्टि से देखा जाता है।