फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रेक्टिकल वर्क करवाने से बच्चे का जल्द होगा कौशल विकास

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चरखी दादरी। स्कूली बच्चों के बैग का वजन घटाने के फैसले का विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपलों और शिक्षकों ने जायज बताया है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए प्ले के जरिए भी पढ़ाया जा सकता है। आज के दौर में प्रतियोगिताओं के चलते निजी स्कूल अनावश्यक पुस्तकें लगवा रहे हैं। इन स्कूल प्रबंधकों को अपनी आपसी स्पर्धा को छोड़कर बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।
इनका मानना है कि पुस्तक की बजाय प्रायोगिक तौर पर स्कूल में तकनीकी ज्ञान भी साथ-साथ दिया जाए। इन शिक्षकों की राय है कि बच्चे बैग के भारी बोझ से परेशान हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों का बचपन पुस्तकों के बोझ से लदा नहीं होना चाहिए। शिक्षक का अनुभव और शिक्षण पद्घति में बदलाव लाने का समय है। मानव संसाधन मंत्रालय ने सही दिशा में यह कदम उठाया है। शिक्षाविदों का मानना है कि अगर सभी स्कूल प्रबंधक इस फैसले को अमलीजामा पहनाएं तो बेहतर होगा। उनके अनुसार बच्चों के बस्ते से अनावश्यक पुस्तकों का बोझ कम होना चाहिए और बच्चों के बस्तों में पाठ्यक्रम पर आधारित पुस्तकें ही होनी चाहिए। अधिकतर शिक्षकों ने स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के फैसले को सही माना है।
विज्ञापन



बैग का वजन कम करने का फैसला सही है। प्रेक्टिकल वर्क करवाने से बच्चे का कौशल विकास जल्द होता है। इसके लिए स्कूल में खेल और अन्य कार्यक्रम समय-समय पर करते रहना चाहिए। खेल-खेल में बच्चा पढ़ाई में निपुण और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेगा। - रमेश शर्मा, प्रधानाचार्य, जेडीकेडीईएस स्कूल

बैग का वजन कम करने से बच्चों का दिमागी बोझ कम हो सकेगा। पुस्तकें तो हर विषय की शामिल हो मगर उसका तरीका ऐसा हो जिससे बच्चों की पढ़ाई भी पूरी हो और विषय भी कम नहीं हो। सरकार का यह फैसला सही है। - डॉ. जसबीर ग्रोवर, प्रधानाचार्या, डीआरके स्कूल

पहले बच्चों को स्कूल में प्रेक्टिकल करवाना चाहिए। इससे बैग वजन कम होगा। सभी विषय की पुस्तकें न मंगवाकर केवल वर्क कॉपी ही मंगवाई जाए तो बच्चों को बैग के बोझ से छुटकारा मिल जाएगा। - सुनीता सांगवान, उपप्रधानाचार्य परसराम हेतराम स्कूल
विज्ञापन


सभी निजी स्कूलों में अनावश्यक पुस्तकें लगवाई जा रही हैं। बैग का वजन कम करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। इससे जहां अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ता है तो वहीं बच्चे के बस्ते का वजन भी बढ़ जाता है। - सुमन, अध्यापिका, सर छोटूराम स्कूल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें