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उद्योगपतियों बोले, सरकार डीजल व पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाएं

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उद्योगपतियों बोले, सरकार डीजल व पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सरकार के आम बजट मेें उद्योगपति, मिल मालिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालक जीएसटी की दरों में सरलीकरण, पेट्रोल व डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने और आयकर में छूट की सीमा पांच लाख तक करने की अपेक्षाएं कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि आम बजट में व्यापारियों और उद्योगपतियों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि व्यापार में जटिलताओं का निराकरण हो सके। व्यापारियों का मानना है कि इस समय जीएसटी की वजह से उनका कारोबार काफी जटिल बना हुआ है। सरकार को जीएसटी का पूरी तरह से सरलीकरण करना चाहिए। मिल मालिकों का कहना है कि सरकार ने जब जीएसटी लागू की तब यह तर्क दिया जा रहा था कि पूरे देश में एक ही टैक्स प्रणाली हो जाएगी । बार- बार टैक्स का झंझट खत्म हो जाएगा लेकिन सरकार अब जीएसटी कर भी वसूली कर रही है तथा आयकर भी ले रही है यह दोनो कर नहीं होने चाहिए। इन व्यापारियों ने सरकार से आम बजट में आयकर में छूट की सीमा पांच लाख तक किए जाने की मांग की है ताकि ऊद्योग वर्ग के अलावा हर वर्ग के लोगों को फायदा हो सके।

बजट में ऐसा प्रावधान हो जिससे इंस्पेक्टरी राज कम से कम हो सके। व्यापारियों की सुरक्षा पर जरूर फोकस किया जाए। व्यापारियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सरकार को पुख्ता प्रबंध करने चाहिए। आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख तक कर देनी चाहिए इससे सभी को फायदा होगा। बजट पूरी तरह से संतुलित होना चाहिए। बजट में कोई नया कर नहीं लगाना चाहिए। - अर्जुनलाल बजाज, सचिव हरियाणा व्यापार मंडल
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जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए। जीएसटी की दरें इस समय काफी ज्यादा हैं। जीएसटी के दो ही स्लैब पांच व 12 प्रतिशत होनी चाहिए। इंस्पेक्टरी राज कम होना चाहिए। आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख तक कर देनी चाहिए। आम बजट मेें व्यापार जगत के हितों का ध्यान रखना चाहिए ताकि व्यापारियों के समक्ष आ रही समस्याओं का काफी हद तक निदान हो सके। - गोविंद मकड़ानिया, मिल मालिक

आम बजट ऐसा हो जिसमें हर व्यापारी खासकर छोटे से बड़े दुकानदार को राहत मिले और उद्योग जगत को बढ़ावा मिले। सरकार को आम बजट में व्यापारियों के हितों के लिए विशेष प्रावधान करने चाहिए। आम बजट ऐसा हो जिसमें आम व्यापारी के हितों का ध्यान रखा जाए। बजट संतुलित होना चाहिए। आयकर में छूट की सीमा पांच लाख तक कर देनी चाहिए। - कृष्ण मकड़ानिया, मिल मालिक

जीएसटी ने व्यापारियों के कारोबार को जटिल बना दिया है। कारोबार करना आज आसान नहीं रहा। सरकार को आम बजट में जीएसटी को विशेष फोकस करना चाहिए। जीएसटी और इनकम टैक्स में से एक ही कर लिया जाना चाहिए। इससे व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। सरकार को आम बजट में व्यापारियों के हितों का ध्यान रखना चाहिए। - विकास रोमी, व्यापारी

जीएसटी से जुड़ा कर और आयकर दोनो नहीं वसूले जाने चाहिए। सरकार जीएसटी भी ले रही है और आयकर भी भरना पड़ रहा है इससे व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर आयकर में छूट की सीमा पांच लाख तक कर देनी चाहिए ताकि व्यापारियों को कुछ तो राहत मिल सके। - सुशील कुमार, अनाज मंडी व्यापारी

बिजली के रेट कम होने चाहिए। रेट ज्यादा होने की वजह से उत्पादन पर खर्च ज्यादा बढ़ रहा है। इससे बचत नहीं हो पाती। सरकार को ई-वे बिल सिस्टम को खत्म करना चाहिए। इससे व्यापारी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आम बजट में ऐसा प्रावधान हो जिससे छोटे व बड़े स्तर के दोनो ही व्यापारियों को फायदा हो सके तथा वे अपना कारोबार आसानी से चला सके। - विनोद कुमार, मिल संचालक

सरकार को जीएसटी की दरों में संशोधन करना चाहिए। आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख तक करनी चाहिए। बजट में व्यापारियों पर अनावश्यक कर का प्रावधान नहीं होना चाहिए। आज पहले ही व्यापारी जीएसटी की मार झेल रहा है। जीएसटी की दरों का पूरी तरह से सरलीकरण होना चाहिए। - विजय कुमार, मिल संचालक
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सरकार को आम बजट में व्यापारियों के हितों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। पेट्रोल व डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। आयकर में छूट पांच लाख तक की जानी चाहिए ताकि व्यापारियों के अलावा कर्मचारी पेशा से जुड़े लोगों को भी फायदा हो सके। बजट में कोई नया कर नहीं लगाना चाहिए। मौजूदा कर प्रणाली को और सरल करना चाहिए। जरूरत की आम वस्तुओं पर कर नहीं लगाना चाहिए। - तरण कुमार, मिल संचालक
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