अमर उजाला ब्यूरो
बेरी (झज्जर)।
कस्बा बेरी में दो जलघर होने के बावजूद भी फिलहाल पेयजल संकट गहराया हुआ है। इसको लेकर आमजन काफी परेशानी है। गर्मी के मौसम में तो अक्सर पेयजल की किल्लत रहती है, लेकिन सर्दी के मौसम में भी विभाग पेयजल की सप्लाई सुचारु रूप से नहीं कर पा रहा। लोगों का कहना है कि पानी की सप्लाई न होने को लेकर बेरी निवासी जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय जाते हैं तो अधिकारियों को एक ही जवाब था कि टैंकों में पानी कम है। कम पानी होने के कारण मोटर पानी नहीं उठा पाती है। जबकि लोगों ने बताया कि जब टैंकों में पूरा पानी होता है तो विभाग द्वारा पानी की सप्लाई जरूरत से ज्यादा छोड़ी दी जाती है।
पेयजल संकट को लेकर कहा जा रहा है कि 18 दिसंबर को सिंचाई विभाग द्वारा झज्जर डिस्ट्रीब्यूटर में पानी छोड़ा जाना था, लेकिन अब 28 दिसंबर की रात नहर में पानी छोड़ा जाएगा, जिसके बाद नहर में पानी के आने के बाद विभाग द्वारा टैंकों में पानी को भरा जाएगा। इसके बाद ही कस्बे में पेयजल सप्लाई सुचारु रूप से दी जाएगी।
40 मिनट से घटाकर 30 मिनट की पेयजल सप्लाई
बेरी के दोनों जलघरों में पानी कम होने से विभाग ने पिछले सप्ताह यह निर्णय लिया कि कस्बे में एक ही छोड़कर दूसरे दिन पेयजल की सप्लाई दी जाएगी और 30 मिनट ही पेयजल सप्लाई की जाएगी। जिससे पानी की समस्या न बने। लेकिन सोमवार को नए जलघर के रिफलेक्स वॉल में मछलियां फंसने से नए जलघर से बेरी कस्बे के तीन जोनों में पेयजल की सप्लाई नहीं हो पाई, इससे लोगों को पानी टैंकरों से खरीद कर पीना पड़ रहा है।
कैसे होगा ओडीएफ का सपना पूरा
प्रशासन और सरकार द्वारा चलाए जा रहे खुले में शौच मुक्त अभियान को पानी के समस्या के चलते इस क्षेत्र में पलीता लगता दिखाई दे रहा है, पानी की समस्या के चलते लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के माध्यम से पानी की समस्या का समाधान कराए, तब जाकर खुले में शौच मुक्ति की ओर लोग रुक सकते हैं। अन्यथा शौच जाना प्रतिदिन दिनचर्या का एक हिस्सा है, अगर घर में पानी ही नहीं होगा, तो निश्चित रूप से व्यक्ति बाहर शौच के लिए जाने को मजबूर होगा।
खुले में शौच जाना बना मजबूरी
सरकार द्वारा लगभग 8 वर्ष पूर्व बेरी में करोड़ों रुपये की लागत से सीवरेज का निर्माण कराया गया था, लिहाजा विभाग के दबाव के बावजूद कुछ लोगों ने सीवरेज के कनेक्शन अपने घरों में करा लिए। लेकिन सीवरेज व्यवस्था सुचारु रूप से चले, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का होना बेहद जरूरी है। हिदायतों के अनुसार प्रति व्यक्ति 175 लिटर पानी की उपलब्धता होनी जरूरी है, मगर बेरी मेें 175 लिटर पानी प्रति व्यक्ति तो क्या पानी पूरी मात्रा में ही नहीं पाता है। ऐसे में सीवरेज व लोगों के घरों में बने शौचालय भी ठप पड़े हैं। लोगों को मजबूरन पानी के अभाव में अपने क्षेत्र के बाहर खुले में मजबूरन शौच के लिए जाना पड़ता है।
वर्जन
पिछले माह में नहर में पानी कम आया था, जिससे टैंकों में पानी स्टाक कम हो पाया और जिसके चलते अब टैंकों में पानी कम बचा हुआ है और कस्बे में 30 मिनट पानी की सप्लाई दी जा रही है और कस्बे में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन पानी की सप्लाई दी जाती थी। सोमवार को नए जलघर में रिफलेक्स वॉल में मछलियां फंसने से बेरी कस्बे के नए जलघर से तीन जोनों में पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। वॉल को ठीक करवाकर करके कस्बे में सप्लाई दी जाएगी। अगले 3-4 दिन बाद नहर में पानी आ जाएगा और टैंकों में पानी भरकर सुचारु रूप से पानी की सप्लाई दी जाएगी।
- प्रेम सिंह, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग बेरी।